Publish Date: Tue, 09 Dec 2025 02:43:34 PM (IST)
Updated Date: Tue, 09 Dec 2025 02:45:24 PM (IST)
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रदेश में मेडिकल पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) सीटों की नई वितरण व्यवस्था को लेकर सोमवार को डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। मेडिकल कॉलेज रायपुर सहित प्रदेशभर के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों ने ब्लैक-रिबन (काला फीता) पहनकर और कैंडल मार्च निकालकर प्रवेश नियमों में हुए संशोधन का विरोध किया।
सभी प्रमुख संगठन एक साथ आए
संशोधित नियम का विरोध करने के लिए छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, रेगुलर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ इनसर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन जैसे सभी प्रमुख संगठन एक साथ आए। इन सभी संगठनों ने एकजुट होकर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसरों में ब्लैक-रिबन प्रोटेस्ट किया। डॉक्टरों का कहना है कि यह बदलाव राज्य के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
दो साल के ग्रामीण बांड के बावजूद अवसर कटौती पर रोष
डॉक्टरों ने इस बात पर सबसे ज्यादा रोष व्यक्त किया कि एक ओर तो प्रदेश के एमबीबीएस डॉक्टरों को दो साल का अनिवार्य ग्रामीण सेवा बांड भरना पड़ता है, जिसके तहत राज्य उनकी सेवा सुनिश्चित करता है। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने उनके पीजी सीटों के कोटे को घटाकर उन्हें राज्य के भीतर ही प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया है। फेडरेशन का कहना है कि यह नियम अत्यंत अन्यायपूर्ण है और बिना पर्याप्त अवसर दिए ग्रामीण सेवा बांड की शर्त थोपना उन्हें बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति की ओर धकेल रहा है।
क्यों हो रहा है विरोध?
दरअसल, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक दिसंबर से पीजी सीटों की संरचना में बदलाव किया है। संशोधित नीति के तहत, राज्य के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटों में से 25 प्रतिशत सीटों को ओपन मेरिट कोटे में रखा गया है। एसोसिएशन और छात्रों का कहना है कि नया नियम बाहरी राज्यों से पढ़े उम्मीदवारों को भी ओपन मेरिट के माध्यम से समान रूप से प्रतिस्पर्धा का अवसर देता है। इससे राज्य के मेडिकल ग्रेजुएट्स को नुकसान होगा।
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राज्य के छात्रों के लिए सीटें घटने का दावा
विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर संगठनों का दावा है कि इस संशोधन से राज्य के छात्रों के लिए कोटा घटाकर ओपन मेरिट कोटे में 75 प्रतिशत सीटें दे दी गई हैं। उनका तर्क है कि राज्य के भीतर पढ़ने वाले और काम करने वाले डॉक्टरों को पीजी सीटों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए ताकि वे राज्य की स्वास्थ्य सेवा में योगदान दे सकें। इस नियम से राज्य के पात्र उम्मीदवारों के लिए पीजी में प्रवेश कठिन हो जाएगा।
विधानसभा में प्राथमिकता के आधार पर मांग
डॉक्टर संगठनों ने यह मांग की है कि इस अतिसंवेदनशील मुद्दे को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्राथमिकता मांग के तहत तुरंत उठाया जाए। उनकी मुख्य मांग है कि राज्य के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत पीजी राज्य कोटा को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि इन डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा बांड की शर्त के बदले आनुपातिक अवसर मिल सकें।