नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। जिले के बिजौर संकुल में पुस्तक, खेल सामग्री व अन्य सामान के फर्जी परिवहन की आड़ में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बिहार में हुए चारा घोटाले की तर्ज पर इस मामले में भी पेश किए गए फर्जी बिलों में जिन वाहनों को पिकअप व ऑटो दर्शाया गया है, उनके नंबरों की जांच में ये स्कूटी व बाइक पाए गए हैं।
बहरहाल कुल 4 लाख 88 हजार की गड़बड़ी में पूर्व प्राचार्य व संकुल समन्वयक की कारगुजारी सामने आई है। पूरी जांच से और भी राज खुल सकते हैं और आंकड़ा भी बढ़ सकता है।
बिहार के चारा घोटाला मामले की जांच में पता चला था कि पशु आहार के परिवहन के लिए जिन वाहनों का उपयोग होना दर्शाया गया था, असल में उनके नंबर स्कूटर व मोटरसाइकिलों के पाए गए थे। जिले के बिल्हा ब्लाक के संकुल केंद्र बिजौर में भी ठीक तरह की गड़बड़ी की गई है।
आरटीआइ के माध्यम से प्राप्त किए गए दस्तावेज इसकी पुष्टि कर रहे हैं। मामले में संकुल प्राचार्य हेमलता पांडेय और समन्वयक मनोज सिंह ठाकुर पर समग्र शिक्षा की अनुदान राशि में भ्रष्टाचार का आरोप है। दस्तावेजों से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच 30 से अधिक फर्जी परिवहन बिल लगाकर 4.88 लाख से अधिक की राशि निकाली गई।
इन बिलों में जिन वाहनों के नंबर दिए गए, वे अधिकतर दोपहिया स्कूटी, मोटरसाइकिल और निजी कारें थीं। इन्हें पिकअप व मालवाहक आटो दर्शाया गया था। आरटीओ जांच में यह प्रमाणित हुआ कि ये वाहन परिवहन के लिए उपयुक्त नहीं थे। इधर, बिलों में पता, संपर्क विवरण या परिवहन सामग्री का कोई विवरण भी नहीं था।
ऑडिट की लापरवाही ने बढ़ाया संदेह
फर्जी परिवहन बिलों के बावजूद आडिट से मंजूरी मिल जाना खुद आडिट प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दस्तावेजों में स्पष्ट खामियां होने के बाद भी उन्हें पारित किया गया। माना जा रहा है कि या तो जांच सतही तौर पर की गई या फिर संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अनदेखी की। यह स्थिति संकुल स्तर से ऊपर के प्रशासनिक ढांचे में भी संभावित मिलीभगत या घोर उदासीनता की ओर इशारा कर रही है।
फर्जी बिल जो खोल रहे भ्रष्टाचार की परत दर परत
मोटर साइकिल बनी पिकअप
प्राप्त दस्तावेज में बिजौर संकुल ने एक बिल लगाया है, जो शनि ट्रांसपोर्ट इमलीपारा बिलासपुर का है। बिल में वाहन का नाम पिकअप वाहन संख्या सीजी 10-एपी- 8536 है। इसका चालक पप्पू महराज है। यह वाहन नेहरू नगर से बिजौर स्कूल ले जाया गया है।
इसका भुगतान 1500 रुपये हुआ है्। जब इसकी जांच की गई व आरटीओ से वाहन की जानकारी निकाली गई तो पता चला कि वाहन पिकअप नहीं, बल्कि मोटर साइकिल है। उसका नंबर भी सीजी 10-एपी-8536 है। यह परमेश्वर कुमार साहू के नाम पर दर्ज पाया गया है।
स्कूटी बनी ऑटो
इसी तरह दिनांक 18/7/2024 का एक बिल ग्लोबल ट्रैव्लर्स के नाम का है। इसमें पुस्तक व लेबर जिस वाहन से संकुल बिजौर के लिए भेजा गया था, उसे बिल में आटो दर्शाया गया है। इसका नंबर सीजी 10 बीसी 1127 दर्शाया गया है। जब इस नम्बर की जांच के लिए आरटीओ से दस्तावेज प्राप्त किया गया, तो पता चला की वाहन एक मोटर साइकिल है, जो दुर्गेश कौशिक के नाम पर दर्ज है।
विजय तांडे, जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर ने कहा कि समग्र शिक्षा की अनुदान राशि प्राप्त करने के लिए गलत दस्तावेज व बिलों का उपयोग करने संबंधी शिकायत मिली है। पूरे मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।