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छत्तीसगढ़ में जनगणना–2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके सफल आयोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रायपुर में अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का मकसद जनगणना प्रक्रिया की बारीक जानकारी देना और फील्ड
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देश की सबसे अहम प्रशासनिक प्रक्रिया
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक है। इसके जरिए जनसंख्या से जुड़े सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाए जाते हैं, जो सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों की बुनियाद बनते हैं।
डिजिटल सर्वे से लेकर गोपनीयता तक पर फोकस
अधिकारियों को जनगणना के सभी चरणों की जानकारी दी गई। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह, घर-घर जाकर सर्वे करने की प्रक्रिया, जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना और तय समय में काम पूरा करने पर खास जोर दिया गया। साथ ही, फील्ड में आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई।
निष्ठा और सटीकता से निभानी होगी जिम्मेदारी
कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि जनगणना में लगे हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और सटीकता के साथ काम करे, ताकि जनगणना–2027 सफलतापूर्वक पूरी हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला जनगणना अधिकारी मनीष मिश्रा, जनगणना सहायक रामनारायण वर्मा, निदेशालय से आशीष मिश्रा सहित जिले के सभी चार्ज अधिकारी उपस्थित रहे।
जनगणना 2027 दो चरणों में होगी, 2026 से शुरू होगी प्रक्रिया
देश की अगली जनगणना 2027 की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। इसकी शुरुआत साल 2026 में घरों की लिस्टिंग और आवास से जुड़ा डेटा जुटाने से होगी। पहले चरण में आवास गणना होगी, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी की गिनती की जाएगी।
पहला फेज 2026 में, दूसरा 2027 में
सरकार के मुताबिक, पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच करीब 30 दिनों में पूरा किया जाएगा। इसकी टाइमलाइन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तय की जाएगी।दूसरा चरण, जिसमें आबादी की गिनती होगी, फरवरी 2027 में किया जाएगा।
1 मार्च 2027 होगी रेफरेंस डेट
जनगणना 2027 की टाइमलाइन पहले की जनगणनाओं की तरह ही रखी गई है। मंत्रालय ने बताया कि पूरे देश के लिए 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे को रेफरेंस डेट माना जाएगा।हालांकि, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में आबादी की गिनती सितंबर 2026 में होगी। इन क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 को रेफरेंस डेट तय की गई है।
जनगणना 2027 से जुड़ी अहम बातें
- पिछली जनगणनाओं से मिली सीख और कुछ राज्यों में हुए जाति-आधारित सर्वे के अनुभव को इस बार शामिल किया जाएगा।
- जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल संबंधित मंत्रालयों, यूजर संगठनों और विषय विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तय किए जाते हैं।
- ऑफिशियल गजट में नोटिफिकेशन से पहले ड्राफ्ट प्रश्नावली की फील्ड टेस्टिंग की जाती है।
- जनगणना 2027 के लिए देशभर में प्री-टेस्ट 30 नवंबर को पूरा हो चुका है। फाइनल प्रश्नावली जल्द नोटिफाई होने की उम्मीद है।
- हाउस लिस्टिंग फेज का पायलट 10 से 30 नवंबर 2025 के बीच किया गया, जिसमें डिजिटल डेटा कलेक्शन मॉडल भी टेस्ट किया गया।
- जनगणना 2027 में जाति की गिनती कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स के 30 अप्रैल 2025 के फैसले के अनुसार होगी।
जनगणना होगी लगभग पूरी तरह पेपरलेस
सरकार ने बताया कि जनगणना 2027 में मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रक्रिया काफी हद तक पेपरलेस होगी।कागजी जानकारी पढ़ने के लिए AI आधारित टूल्स, GPS टैगिंग और प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मेन्यू का इस्तेमाल होगा, जिससे गलती की गुंजाइश कम होगी। आम लोगों को जागरूक करने के लिए देशव्यापी प्रचार भी किया जाएगा।