छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में सीएचपी चौक पर जेपीएल (JPL) की प्रस्तावित जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे थे। आज पुलिस धरना हटाने पहुंची। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और स्थिति हिंसक हो गई।
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ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव किया। भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी। महिला थाना प्रभारी कमला पुषाम को महिलाओं ने लात मारी, जिससे थाना प्रभारी घायल हो गई हैं। हालात बेकाबू हो गए हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन अभी लोगों को शांत कराने में लगी हुई है।
देखिए हिंसा की तस्वीरें…

प्रदर्शनकारियों ने तीन वाहनों में आग लगा दी।

महिला थाना प्रभारी को महिलाओं ने मारी लात। जमीन पर गिर गईं अधिकारी।

महिला थाना प्रभारी जख्मी हो गईं, जिसे पानी पिलाया जा रहा।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ ग्रामीणों को हिरासत में लेकर थाना भेजा, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। इसके बाद पुलिस पर पथराव किया गया। घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं।
एक वीडियो में महिलाएं तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम से मारपीट करती नजर आ रही हैं, जबकि दूसरे वीडियो में वही महिलाएं उन्हें पानी पिलाती दिखाई दे रही हैं। पथराव और झड़प के दौरान थाना प्रभारी कमला पुषाम घायल हो गईं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी।
भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी
वहीं, उपद्रव के दौरान तीन वाहनों में आग लगा दी गई। इनमें से एक वाहन एसडीएम का बताया जा रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
स्थिति पर नजर रखी जा रही है और मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अब पढ़िए कोल खदान के खिलाफ कहां-कहां विरोध प्रदर्शन ?
पहला मामला- सरगुजा में 25 पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों पर भी पथराव
पहला मामला सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस का है। कोल माइंस विस्तार के खिलाफ ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया।
हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, SECL ने अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीनें साल 2001 में अधिग्रहित की थीं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगभग 500 पुलिसकर्मियों के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए गांव पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर…
दूसरा मामला- रायगढ़ में कोल माइंस का विरोध
वहीं दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में कोयला खदान का है। ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के लोग अपनी जल, जंगल और जमीन को खदान के लिए देने से इनकार कर चुके हैं। 6 नवंबर को उन्होंने धरना प्रदर्शन किया।
कोयला खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को ग्रामीण रद्द की मांग कर रहे थे। 6 नवंबर को करीब 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद ग्रामीण रातभर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। इस धरने में महिलाएं, बच्चे और लड़कियां भी शामिल थीं। पढ़ें पूरी खबर….
तीसरा मामला- कोरबा में CISF ने ग्रामीणों पर बरसाई लाठियां
तीसरा मामला कोरबा जिले के SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान का है। गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस दौरान जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। भू-विस्थापित रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पढ़ें पूरी खबर…