नया साल आने वाला है और जश्न की प्लानिंग भी तेज हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में हर साल न्यू ईयर पर वही जानी-पहचानी जगहों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। होटल फुल, सड़कें जाम और सेलिब्रेशन के नाम पर सिर्फ शोर-शराबा। लेकिन इस बार ट्रेंड कुछ अलग है।
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लोग भीड़ से दूर, शांत, प्राकृतिक और कम भीड़ वाली जगहों पर नया साल मनाने का मन बना रहे हैं, जहां प्रकृति के बीच सुकून मिले और साल की शुरुआत यादगार बने। इसी ट्रेंड के चलते छत्तीसगढ़ की कुछ कम चर्चित, लेकिन बेहद खूबसूरत डेस्टिनेशन्स सोशल मीडिया और ट्रैवलर्स के बीच तेजी से पॉपुलर हो रही हैं।
कहीं झरनों की आवाज है, कहीं बैकवॉटर का सुकून, तो कहीं पहाड़ियों और जंगलों के बीच बसे डैम और पिकनिक स्पॉट। न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए अब लोग रील्स और पार्टी नहीं, बल्कि शांति, नेचर और एडवेंचर चुन रहे हैं।
अगर आप भी इस बार भीड़ से हटकर कुछ अलग और खास प्लान करना चाहते हैं, तो ये ट्रेंडिंग 10 जगहें आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन बन सकती हैं…
पहले कुछ ये तस्वीरें देखिए…





बोइर पड़ाव (खोंद्रा) बिलासपुर: घने जंगलों के बीच छिपा बिलासपुर का नेचर कैंप और पिकनिक स्पॉट
बिलासपुर जिले से करीब 35-40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोइर पड़ाव नेचर कैंप, जिसे स्थानीय लोग खोंद्रा के नाम से भी जानते हैं, प्रकृति प्रेमियों के लिए एक शांत और अनएक्सप्लोर्ड डेस्टिनेशन है। घने जंगलों के बीच बना यह पिकनिक स्पॉट उन लोगों को खास तौर पर पसंद आता है, जो भीड़-भाड़ से दूर सुकून के पल बिताना चाहते हैं।
कहां स्थित है बोइर पड़ाव (खोंद्रा)?
बोइर पड़ाव पर्यटन स्थल बिलासपुर से करीब 35 किमी दूर जंगल क्षेत्र में स्थित है। आसपास कोई बड़ा गांव या कस्बा नहीं होने की वजह से यह जगह अब तक ज्यादा विकसित नहीं हो पाई है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी मानी जाती है।
क्या है इस जगह की खासियत?
इस नेचर कैंप के बीचों-बीच एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत जलप्रपात बनता है, जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है। चारों तरफ हरियाली, पेड़-पौधों की घनी छाया और जंगल का शांत माहौल इसे एक परफेक्ट नेचर पिकनिक स्पॉट बनाता है। झरना भले ही बड़ा न हो, लेकिन इसका प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को अपनी ओर खींच लेता है।
पिकनिक और आउटिंग के लिए क्यों पसंद की जाती है यह जगह?
बोइर पड़ाव पर लोग दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने आते हैं। खुली जगह, जंगल का वातावरण और पानी की मौजूदगी इसे वीकेंड आउटिंग के लिए बेहतर विकल्प बनाती है। खासकर बारिश के बाद के महीनों में यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।
जंगल होने की वजह से इन बातों का रखें ध्यान
यह इलाका घने जंगल में स्थित है, इसलिए यहां जंगली जीव-जंतुओं की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अब तक किसी तरह के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोग यहां कई तरह के जीव-जंतुओं को देखने का दावा करते हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि समूह में रहें और सुरक्षा को लेकर लापरवाही न बरतें।

देवरी-चिचोली जांजगीर: हसदेव किनारे बसा जांजगीर का सुकून भरा पिकनिक स्पॉट
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित देवरी गांव इन दिनों एक शांत और प्राकृतिक पिकनिक डेस्टिनेशन के तौर पर पहचान बना रहा है। यह जगह देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट के नाम से जानी जाती है, जो हसदेव नदी के किनारे फैली हरियाली और खुले माहौल के लिए मशहूर है। रोजमर्रा की भागदौड़ और शहर की भीड़ से दूर यहां लोग सुकून और थोड़ा वक्त प्रकृति के साथ बिताने पहुंचते हैं।
कहां स्थित है देवरी-चिचोली?
देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के अंतर्गत आता है। यह जिला मुख्यालय जांजगीर से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे यह डे-ट्रिप या वीकेंड आउटिंग के लिए एक आसान विकल्प बन जाता है।
क्या है इस जगह की खासियत?
हसदेव नदी के किनारे बसे इस इलाके में हरे-भरे रास्ते, रंग-बिरंगे फूल और खुला शांत वातावरण मिलता है। न तो ज्यादा शोर, न भारी भीड़ यही वजह है कि यह जगह खासकर परिवार, कपल्स और नेचर लवर्स के बीच पसंद की जा रही है। यहां पहुंचते ही शहर का तनाव खुद-ब-खुद कम होता महसूस होता है।
पिकनिक के लिए क्या सुविधाएं मिलती हैं?
स्थानीय लोगों और ट्रैवल व्लॉग्स के मुताबिक, यहां पिकनिक मनाने वालों के लिए बैठने और आराम करने के लिए शेड्स की व्यवस्था मौजूद है। नदी किनारे खुली जगह होने के कारण लोग खाना बनाने, बच्चों के साथ समय बिताने और फोटो खिंचवाने के लिए इसे बेहतर मानते हैं।

गंगरेल बैक वॉटर एरिया: प्रवासी पक्षियों के बीच सुकून का ठिकाना
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बरबांधा और हरफर गांव के बीच स्थित गंगरेल बैक वॉटर एरिया गंगरेल बांध (रविशंकर जलाशय) का डूबान क्षेत्र है। यह जगह धमतरी से करीब 40 किलोमीटर दूर, गंगरेल बांध के अंतिम छोर पर स्थित है और अब धीरे-धीरे एक शांत नेचर स्पॉट के तौर पर पहचान बना रही है।
बैक वॉटर एरिया होने की वजह से यहां दूर-दूर तक फैला पानी, खुला आसमान और चारों तरफ शांति देखने को मिलती है। सर्दियों के मौसम में यहां प्रवासी पक्षी भी दिखाई देते हैं, जिससे यह जगह बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए खास बन जाती है।
यह इलाका अभी ज्यादा विकसित नहीं है, इसलिए यहां भीड़ और कमर्शियल गतिविधियां नहीं मिलतीं। लोग यहां शांति से समय बिताने, सनसेट देखने और प्रकृति को करीब से महसूस करने पहुंचते हैं। निजी वाहन से यहां पहुंचना आसान है, हालांकि अंतिम हिस्से में कच्चा रास्ता भी मिल सकता है।

खरखरा बांध: राजनांदगांव का सुकून भरा पिकनिक स्पॉट
राजनांदगांव जिले में स्थित खरखरा बांध जिले का एक प्रमुख पर्यटन स्थल और लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है। पानी, हरियाली और शांत माहौल की वजह से यह जगह खासकर गर्मी के मौसम में लोगों को राहत देती है। परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए लोग यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
खरखरा बांध चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक नजारों से घिरा हुआ है। मानसून के बाद यहां का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है। बांध से निकली नहर के ठंडे पानी के कारण यह जगह लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है।
हालांकि पानी गहरा और बहाव तेज होने के कारण सावधानी बरतना जरूरी है। यहां लोग सैर-सपाटा, फोटो और वीडियो शूटिंग के लिए भी आते हैं। प्राकृतिक सुंदरता की वजह से यह स्पॉट फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी बेहतर माना जाता है।

झोझा वॉटरफॉल जीपीएम: ट्रेकिंग के बाद मिलने वाला झरना
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में स्थित झोझा वॉटरफॉल प्रकृति और रोमांच पसंद करने वालों के लिए एक खास डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। हरे-भरे जंगलों के बीच, बम्हनी नदी पर बना यह झरना अपनी ऊंचाई और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। शहर की भीड़ और शोर से दूर यह जगह सुकून के साथ-साथ एडवेंचर का भी अनुभव देती है।
कहां स्थित है झोझा वॉटरफॉल?
झोझा वॉटरफॉल बस्तीबगरा ग्राम पंचायत से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह बिलासपुर जिले के अंदर आता है। घने जंगलों के बीच बसे होने की वजह से यह अब भी ज्यादा कमर्शियल नहीं हुआ है, जिससे इसकी प्राकृतिक खूबसूरती बनी हुई है।
क्या है इस जगह की खासियत?
झोझा वॉटरफॉल की सबसे बड़ी खासियत है करीब 100 फीट ऊंचाई से गिरता पानी, जो नीचे एक शानदार दृश्य बनाता है। बारिश और उसके बाद के महीनों में झरना पूरे वेग के साथ बहता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। आसपास का जंगल, चट्टानें और बहती नदी इसे एक परफेक्ट नेचर स्पॉट बनाती हैं।
यहां पहुंचने के लिए करनी होगी ट्रेकिंग
झोझा वॉटरफॉल तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को करीब 1.5 से 2 किलोमीटर तक ट्रेकिंग करनी पड़ती है। यह ट्रेकिंग आसान नहीं है, लेकिन रोमांच पसंद करने वालों के लिए यह सफर खुद में एक अनुभव बन जाता है। रास्ते में जंगल और प्राकृतिक नजारे ट्रेक को और खास बना देते हैं।

झरझरा माता वॉटरफॉल: न्यू ईयर पर आस्था और प्रकृति का संगम
गरियाबंद जिले में मुरमुरा गांव के पास स्थित झरझरा माता वॉटरफॉल न्यू ईयर पर सुकून और शांति तलाशने वालों के लिए एक बेहतर पिकनिक स्पॉट है। झरने के ठीक सामने स्थित मां झरझरा का मंदिर इस जगह को धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक पहचान भी देता है।
यह एक छोटा लेकिन खूबसूरत झरना है, जो पहाड़ियों और हरियाली से घिरा हुआ है। पक्षियों की चहचहाहट और खुला माहौल इसे परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए उपयुक्त बनाता है। न्यू ईयर पर यहां भारी भीड़ नहीं होती, इसलिए शांति पसंद करने वालों के लिए यह जगह खास मानी जाती है।
नवरात्रि में यहां ज्योति-ज्वारा प्रज्वलन और मेला लगता है, जबकि बारिश के मौसम में झरना पूरे वेग से बहता है। पास ही हनुमान मंदिर और अन्य प्राकृतिक स्थल भी मौजूद हैं। हालांकि आसपास कई बार हाथियों का खतरा भी होता है। इसलिए पहले से जानकारी लेकर ही पहुंचे।

शिशुपाल माउंटेन महासमुंद: झरना, ट्रेकिंग और इतिहास का रोमांच
महासमुंद जिले में सरायपाली के पास स्थित शिशुपाल माउंटेन एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए एक खास जगह मानी जाती है। घने जंगल, ऊंची चट्टानें और बारिश के मौसम में बनने वाला घोड़ाधार झरना इस इलाके को बेहद आकर्षक बना देता है। यही वजह है कि यह जगह धीरे-धीरे ट्रैकिंग और रोमांच पसंद करने वालों के बीच लोकप्रिय हो रही है।
कहां स्थित है शिशुपाल माउंटेन?
शिशुपाल माउंटेन सरायपाली से लगभग 26-30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि रायपुर से दूरी करीब 157-180 किलोमीटर है। यह इलाका अंदरूनी होने के कारण अब भी ज्यादा कमर्शियल नहीं हुआ है।

नंबी जलप्रपात: बस्तर का सबसे ऊंचा और रोमांच से भरा झरना
बीजापुर जिले में स्थित नंबी जलप्रपात बस्तर संभाग का सबसे ऊंचा और सबसे खूबसूरत झरना माना जाता है। करीब 180 से 300 फीट (कुछ आकलन में इससे अधिक) ऊंचाई से गिरता पानी इसे एक सुंदर प्राकृतिक नजारा बना देता है। घने जंगल, ऊंची चट्टानें और दूर-दराज का इलाका सब मिलकर नंबी जलप्रपात को एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाते हैं।
कहां स्थित है नंबी जलप्रपात?
नंबी जलप्रपात बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 64 किलोमीटर दूर, उसूर ब्लॉक के पास स्थित है। यह इलाका तेलंगाना सीमा से सटा हुआ है और बस्तर के अंदरूनी वन क्षेत्र में आता है, इसलिए अब तक यह जगह ज्यादा कमर्शियल नहीं हुई है। क्योंकि इलाके में ऑफ रोड और पैदल भी ट्रेक करना पड़ता है इसलिए ग्रुप में आएं। एडवेंचर पसंद लोगों के लिए नंबी बेस्ट ऑप्शन है।

मांदाघाट जलप्रपात: जंगलों के बीच छिपा कवर्धा का शांत और रोमांचक झरना
कबीरधाम (कवर्धा) जिले में स्थित मांदाघाट जलप्रपात प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक खूबसूरत लेकिन अब भी कम-प्रचारित जगह है। घने जंगलों, पहाड़ियों और बरसाती नालों के बीच बना यह झरना बारिश के मौसम में पूरे वेग के साथ बहता है और एक शानदार प्राकृतिक नजारा पेश करता है।
कहां स्थित है मांदाघाट जलप्रपात?
मांदाघाट जलप्रपात कवर्धा जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका शहर से थोड़ा अंदर होने के कारण अब तक ज्यादा कमर्शियल टूरिज्म का हिस्सा नहीं बना है, जिससे इसकी प्राकृतिक शांति और सुंदरता बनी हुई है।

डंगबोरा डैम: न्यू ईयर पर शांति और प्रकृति के बीच पिकनिक
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ़ के पास ढारा गांव स्थित डंगबोरा डैम (डंगोरा डैम) न्यू ईयर पर भीड़ से दूर समय बिताने के लिए एक बेहतर पिकनिक स्पॉट है। हरी-भरी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह डैम शांत माहौल और खुले नजारों के लिए जाना जाता है।
यह जगह बर्ड वॉचिंग, फिशिंग और नेचर वॉक पसंद करने वालों के बीच लोकप्रिय है। सर्दियों में यहां ठंडा मौसम और पक्षियों की मौजूदगी इसे खास बना देती है। आसपास भवानी माता मंदिर होने के कारण लोग दर्शन के लिए भी यहां रुकते हैं।

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नए साल और सर्दियों की छुट्टियों में यदि आप भी अपने परिवार, दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाने प्लान बना रहे हैं, तो बस्तर सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। बस्तर की हसीन वादियों के बीच स्थित खूबसूरत झरने, मंदिर से लेकर ट्रैकिंग तक के लिए कई पर्यटन स्पॉट हैं। पढ़ें पूरी खबर