अवैध संबंध को नहीं माना जा सकता आत्महत्या के लिए उकसावा, CG High Court ने पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ याचिका खारिज की

Author name

January 5, 2026


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति के अवैध संबंध से तंग आकर पत्नी ने आत्महत्या के मामले में पति और उसकी गर्लफ्रैंड के खिलाफ डायर याचिका को खारिज कर दिया है। ह …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 02:06:16 AM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 02:06:36 AM (IST)

अवैध संबंध को नहीं माना जा सकता आत्महत्या के लिए उकसावा, CG High Court ने पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ याचिका खारिज की
पत्नी के आत्म हत्या मामले में पति और गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त करने के खिलाफ याचिका खारिज

HighLights

  1. पति और गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त करने के खिलाफ की गई अपील खारिज
  2. महासमुंद सत्र न्यायालय ने पति और गर्लफ्रेंड को दोष मुक्त कर दिया था
  3. सुनवाई में हाई कोर्ट ने कहा अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत माने जा सकते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: पति के अवैध संबंध से तंग आकर पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। मामले में मृतिका के पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के मामले में धारा 306 का अपराध कायम किया गया था। सत्र न्यायालय ने पति और गर्लफ्रेंड को दोष मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील की गई थी।

सुनवाई में हाई कोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत माने जा सकते हैं। पर जब तक आत्महत्या के लिए सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो तो 306 के लिए दोषी नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की गई अपील हाई कोर्ट में खारिज कर दी गई।

यह है पूरा मामला

कुंती की शादी वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुई थी। संतान न होने, कम दहेज और अशिक्षित होने को लेकर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। महिला के परिजनों ने साथ ही पति के कथित तौर पर एक महिला मित्र से अवैध संबंध होने की बात कही गई। चार जून 2017 को कुंती की मृत्यु के बाद पति और महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया।

सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या उकसावे का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि अपराध साबित नहीं हुआ इसलिए पति और उसकी गर्लफ्रेंड को दोष मुक्त कर दिया गया। यह फैसला 22 जुलाई 2022 को महासमुंद सत्र न्यायालय ने दिया। दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।

यह भी पढ़ें- अंबिकापुर में वन विभाग की जमीन को निजी संपत्ति बताकर 41 लोगों को बेचा, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं

मामले की सुनवाई जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पति के अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता। अदालत में कहा कि इस अपराध में सजा के लिए प्रत्यक्ष उकसावा, गंभीर मानसिक क्रूरता और ठोस साक्ष्यों का होना जरूरी है। इसी आधार पर मृतिका के पति और उसकी गर्लफ्रेंड को धारा 306 से दोषमुक्त किया गया।

मृतिका ने छोड़ा था सुसाइड नोट

हाई कोर्ट के समक्ष मृतका का डायरी नोट भी रखा गया। अदालत ने कहा कि नोट से यह जाहिर होता है कि मृतका पति से प्रेम करती थी और महिला मित्र से नाराज थी, लेकिन किसी प्रकार के उकसावे या प्रत्यक्ष प्रताड़ना का उल्लेख नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या से उनका सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो, धारा 306 आइपीसी लागू नहीं होती। इनके आधार पर हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।



Source link