साहित्यकार अपमान विवाद के बाद बिलासपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. रमेश गोहे को मिला प्रभार

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January 21, 2026


CG News: साहित्यकार अपमान से जुड़े मामले में सुर्खियों में आए गुरु घासीदास केंद्रीय विवि (जीजीयू) के हिंदी विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 21 Jan 2026 09:16:10 PM (IST)Updated Date: Wed, 21 Jan 2026 09:16:10 PM (IST)

साहित्यकार अपमान विवाद के बाद बिलासपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. रमेश गोहे को मिला प्रभार
जीजीयू में हिंदी विभाग की एचओडी डा. गौरी हटाई गईं, डा.रमेश गोहे को नई जिम्मेदारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। साहित्यकार अपमान से जुड़े मामले में सुर्खियों में आए गुरु घासीदास केंद्रीय विवि (जीजीयू) के हिंदी विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष डा.गौरी त्रिपाठी को उनके पद से हटाते हुए सहायक प्राध्यापक डा.रमेश गोहे को हिंदी विभाग का नया प्रभार सौंपा है। हालांकि प्रबंधन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन यह निर्णय विवाद की पृष्ठभूमि में लिया गया होने के कारण चर्चा में है।

विश्वविद्यालय के मीडिया सेल प्रभारी प्रो. मनीष श्रीवास्तव के अनुसार हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डा. गौरी त्रिपाठी ने जनवरी 2023 में एसोसिएट प्रोफेसर रहते हुए एचओडी का पदभार संभाला था। विश्वविद्यालय के प्रविधानों के तहत एसोसिएट प्रोफेसर के लिए विभागाध्यक्ष का कार्यकाल दो वर्ष तथा प्रोफेसर के लिए तीन वर्ष निर्धारित है। डा. त्रिपाठी बाद में प्रोफेसर पद पर पदोन्नत हो चुकी थीं, ऐसे में उनका निर्धारित कार्यकाल तीन जनवरी 2026 को पूर्ण हो गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्यकाल समाप्त होने के कारण ही विभाग में नया प्रभार सौंपा गया है। इसी क्रम में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा.रमेश गोहे को एचओडी का चार्ज दिया गया है, ताकि विभागीय कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सभी शैक्षणिक गतिविधियों को शांतिपूर्ण और अकादमिक वातावरण में आगे बढ़ाने की बात कही है।

इसलिए चर्चा में हिंदी विभाग

केंद्रीव विवि में सात जनवरी को राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली और विवि के हिंदी विभाग की ओर से राष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम हुआ था। इसमें नागपुर के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा भी शामिल हुए थे। इस दौरान कुलपति प्रो.आलोक कुमार चक्रवाल ने कथाकार रूपड़ा से पूछा कि भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे। इसके जवाब में रूपड़ा ने कहा कि विषय पर ही बात करें। इसके बाद कुलपति ने उन्हें वहां से जाने कह दिया। यही से विवाद उपजा।



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