शिक्षा के मंदिर में ‘तालिबानी’ सजा, 100 बार उठक-बैठक से छात्र की हालत गंभीर, इलाज के लिए रायपुर रेफर

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February 12, 2026


CG News: आरोप है कि दसवीं कक्षा के एक छात्र को सज़ा के तौर पर 100 बार उठक-बैठक कराई गई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। छात्र चलने-फिरने में असमर्थ हो …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 11 Feb 2026 06:49:34 PM (IST)Updated Date: Wed, 11 Feb 2026 06:49:34 PM (IST)

शिक्षा के मंदिर में 'तालिबानी' सजा, 100 बार उठक-बैठक से छात्र की हालत गंभीर, इलाज के लिए रायपुर रेफर
100 उठक-बैठक की सजा से छात्र की बिगड़ी हालत (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. आत्मानंद स्कूल में छात्र को दी गई तालिबानी सजा
  2. शिक्षिकाओं ने छाक्ष से 100 बार उठक-बैठक कराई है
  3. चलने-फिरने में असमर्थ छात्र अस्पताल में भर्ती

नईदुनिया न्‍यूज, मोहला। पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, अंबागढ़ चौकी में शारीरिक दंड का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि दसवीं कक्षा के एक छात्र को सज़ा के तौर पर 100 बार उठक-बैठक कराई गई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। छात्र चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने छात्र को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया है, जहां निजी अस्पताल में उपचार जारी है।

स्‍वजनों के अनुसार, घटना जनवरी माह की बताई जा रही है। किसी बात को लेकर कक्षा में दो शिक्षिकाओं द्वारा छात्र को उठक-बैठक करने के लिए कहा गया। अत्यधिक शारीरिक दंड के बाद छात्र को चक्कर, कमजोरी और नसों में दर्द जैसी शिकायतें शुरू हो गईं। स्थिति बिगड़ने पर स्कूल प्रबंधन ने स्‍वजनों को सूचना दी, जिसके बाद छात्र को अंबागढ़ चौकी के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे रायपुर भेज दिया।

पीड़ित छात्र के परिवार ने शिक्षिकाओं रुचि भागे और वर्षा प्रधान पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शारीरिक दंड के कारण छात्र पिछले एक माह से बिस्तर पर है और स्वयं उठ-बैठ नहीं पा रहा है। परिवार का दावा है कि इलाज के दौरान छात्र को सहारे की आवश्यकता पड़ रही है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

निष्‍पक्ष जांच, सख्‍त कार्रवाई की मांग

घटना को लेकर स्‍वजनों में आक्रोश है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्‍वजनों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा निकट होने के बावजूद छात्र शारीरिक पीड़ा के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रहा है, जिससे उसके भविष्य पर असर पड़ सकता है।



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