कुसमी में SDM पर आदिवासी की मौत का आरोप, बंद और धरने से गरमाया माहौल… एक करोड़ मुआवजा औक सरकारी नौकरी की मांग

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February 17, 2026


नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: अंबिकापुर संभाग के बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम करुण डहरिया और उनके सहयोगियों की पिटाई से बुजुर्ग आदिवासी रामनरेश राम की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आरोपितों को न्यायालय के आदेश पर जेल भेजे जाने के बावजूद लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। सर्व आदिवासी समाज के आह्वान पर कुसमी बंद रहा और बस स्टैंड में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

कुसमी बंद, बस स्टैंड में धरना

सर्व आदिवासी समाज के आह्वान पर मंगलवार को कुसमी पूरी तरह बंद रहा। सुबह से ही सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बस स्टैंड में आयोजित धरने में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह मौजूद रहे। वक्ताओं ने राज्य सरकार की नीति और नीयत पर सवाल उठाते हुए मृतक के आश्रितों को एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये देने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम करुण डहरिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कार्यालय में कथित अव्यवस्था को दूर करने की मांग की। शंकरगढ़ के एसडीएम ने आश्वासन दिया कि अन्य विभागों से संलग्न कर्मचारियों को मूल पद पर वापस भेजा जाएगा। नायब तहसीलदार की भूमिका की भी जांच और कार्रवाई की मांग की गई।

अतिनिर्धन परिवार का मुखिया था रामनरेश

मृतक रामनरेश राम हंसपुर गांव का निवासी था और अत्यंत गरीब परिवार का मुखिया था। उसकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। दो बेटियां और तीन बेटों के सहारे परिवार चलता था। रोज दिहाड़ी मजदूरी के बिना दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल था। गांववालों के अनुसार उसे शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं मिला था और पीएम आवास से भी वंचित था।

घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। उसका शव सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद कुसमी में रखा रहा। मंगलवार शाम को स्वजन ने शव सुपुर्दनामे पर लेकर गांव रवाना हुए। बुधवार को अंतिम संस्कार की संभावना है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

अवैध खनन के आरोप

कुसमी क्षेत्र के मगाजी के पास बाक्साइट के अवैध उत्खनन की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि झारखंड से आए कुछ प्रभावशाली लोग लंबे समय से अवैध खनन कर रहे थे। आरोप यह भी है कि इस गतिविधि को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन का विरोध करने के कारण विवाद की स्थिति बनी और घटना घटी।

कांग्रेस की जांच कमेटी गठित

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 10 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति के संयोजक अमरजीत भगत बनाए गए हैं। अन्य सदस्यों में डॉ. प्रीतम राम, पारसनाथ राजवाड़े, भानुप्रताप सिंह, डॉ. अजय तिर्की, विजय पैकरा, शफी अहमद, राजेंद्र तिवारी, राकेश गुप्ता और हरिहर प्रसाद यादव शामिल हैं।

समिति संबंधित गांव का दौरा कर पीड़ित परिवार, ग्रामीणों और प्रशासन से चर्चा कर रिपोर्ट तैयार करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



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