अंबिकापुर के सामरी क्षेत्र में कुसमी एसडीएम से जुड़े विवाद के बीच ग्रामीण रामनरेश राम की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। …और पढ़ें

HighLights
- रोजगार नहीं मिलने से पलायन को मजबूर युवा
- चेन्नई से लौटे बेटे, नहीं देख सके पिता
- डॉ. चरणदास महंत ने आयोग से जांच मांगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। सामरी क्षेत्र में रामनरेश राम की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे संजय कुमार और किशुन चेन्नई से गांव लौटे, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि वे अपने पिता की अंतिम झलक तक नहीं देख पाए। परिवार का तीसरा बेटा सिलमन गांव में ही पिता के साथ रहता था और घटना के समय मौजूद था।
संजय और किशुन चेन्नई के पास एक मछली पालन केंद्र में मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाने में सहयोग करते थे। दोनों के अनुसार, वे जो राशि भेजते थे, उसी से पिता खेती-बाड़ी और घर का खर्च संभालते थे। पिता की अचानक मौत से परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया है।
अवैध बाक्साइट खनन बना विवाद का कारण
ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड सीमा पर संचालित अवैध बाक्साइट खदान इस पूरे विवाद की जड़ है। क्षेत्र में लंबे समय से अवैध उत्खनन का विरोध किया जा रहा था। आरोप है कि गांववालों को डराने-धमकाने के दौरान एसडीएम और उनके साथियों ने तीन ग्रामीणों की पिटाई की, जिसमें गंभीर रूप से घायल रामनरेश राम की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि हंसपुर के नजदीक संचालित अवैध खदान से उच्च गुणवत्ता का बाक्साइट निकाला जा रहा था। सरगुजांचल की अन्य खदानों से निकलने वाला बाक्साइट आमतौर पर लाल और मिट्टी मिश्रित होता है, जबकि यहां का बाक्साइट ज्यादा चमकदार बताया जा रहा है, जिससे उसमें एल्युमिना की मात्रा अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस खदान पर बाहरी प्रभावशाली लोगों की नजर थी और एसडीएम से जुड़े कुछ युवक भी इसमें संलिप्त थे।
खदानों के बावजूद रोजगार को तरसते युवा
घटना ने क्षेत्र में संसाधनों के बंटवारे और रोजगार की कमी पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास कई बाक्साइट खदानें वर्षों से संचालित हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिलता। यही वजह है कि संजय और किशुन सहित लगभग 20 युवा दूसरे राज्यों में काम करने को मजबूर हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने मानवाधिकार आयोग से की जांच की मांग
विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने इस घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र और विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन को पत्र लिखकर कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग से एक निर्दोष आदिवासी ग्रामीण की मौत हुई है।
पत्र में उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश, पीड़ित परिवार को मुआवजा तथा प्रभावित ग्रामीणों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि त्वरित और निष्पक्ष जांच से ही न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहेगा।