छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में गांव से जंगल में लकड़ी बीनने गई एक महिला की हाथी के हमले में मौत हो गई। दो दिन की तलाश के बाद ग्रामीणों को महिला का शव जंगल …और पढ़ें

HighLights
- हाथी के हमले से वृद्धा की मौत
- दो दिन बाद जंगल में मिला शव
- जंगल में लकड़ी लेने गई थी महिला
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। मैनपाट विकासखंड के बरिमा गांव से जंगल में लकड़ी बीनने गई एक महिला की हाथी के हमले में मौत हो गई। घटना सरगुजा-रायगढ़ सीमा पर स्थित कापू के जंगल क्षेत्र की है। दो दिन की तलाश के बाद ग्रामीणों को महिला का शव जंगल में पड़ा मिला।
जानकारी के अनुसार बरिमा निवासी इतवारी बाई (65) सोमवार को रोज की तरह जंगल में लकड़ी बीनने के लिए घर से निकली थीं। बताया जा रहा है कि लकड़ी बीनते-बीनते वह सरगुजा और रायगढ़ जिले की सीमा पर कापू के जंगल क्षेत्र तक पहुंच गईं। इसी दौरान उनका सामना हाथियों के दल से हो गया। आशंका है कि हाथियों ने उन्हें पटककर मार डाला।
शुरुआत में महिला का नहीं मिला कोई सुराग
सोमवार देर शाम तक जब इतवारी बाई घर नहीं लौटीं तो स्वजन को चिंता हुई। स्वजन ने आसपास के जंगल क्षेत्र में खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। मंगलवार को भी ग्रामीणों के साथ मिलकर जंगल में तलाश की गई, फिर भी सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह ग्रामीण पुनः खोज के लिए निकले और कापू सीमा क्षेत्र में पहुंचे।
वहां जंगल के भीतर इतवारी बाई का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा मिला। घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही मैनपाट तथा रायगढ़ वन मंडल के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे और जांच की।वन विभाग ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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पोस्टमार्टम उपरांत शव स्वजन को सौंप दिया गया। वन कर्मचारियों ने बताया कि क्षेत्र में चार हाथियों का दल दो दिन से विचरण कर रहा था। संभवतः महिला अनजाने में हाथियों के नजदीक पहुंच गई थीं, जिससे यह घटना घटित हुई।
मामले की जांच की जा रही है। इधर, घटना के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की सतत निगरानी और मुनादी के माध्यम से सतर्कता बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।