छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पित माओवादी तीन साल बाद ही निकाल सकेंगे इनामी राशि, गृहमंत्री ने सदन में दी जानकारी

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February 27, 2026


विधानसभा सत्र के प्रश्नकाल के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए चलाई जाने वाली पुर्नवास नीति में कुछ बदलाव किए गए ह …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 27 Feb 2026 08:41:27 AM (IST)Updated Date: Fri, 27 Feb 2026 09:09:27 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पित माओवादी तीन साल बाद ही निकाल सकेंगे इनामी राशि, गृहमंत्री ने सदन में दी जानकारी
माओवादियों के इनाम राशि के भुगतान के नियमों में बदलाव (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में दी जानकारी
  2. इनामी राशि के भुगतान नियमों में किया बदलाव
  3. इनामी राशि में से 49.34 करोड़ का भुगतान बाकी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास का मुद्दा उठा। इसमें उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में बताया कि आत्मसमर्पित माओवादियों की इनाम राशि के भुगतान के नियमों में बदलाव किया गया है। एक विशेष सुरक्षा नियम के तहत वे इस पैसे को तीन साल बाद ही बैंक से निकाल सकेंगे।

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम आत्मसमर्पितों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा नियमों के तहत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों की पूंजी सुरक्षित रहे और वे इसका सही उपयोग कर सकें।

आंकड़ों से दी आत्मसमर्पितों की जानकारी

गृहमंत्री ने सदन को नौ फरवरी 2026 तक की स्थिति के आंकड़े पेश किए। प्रदेश में अब तक कुल 2,937 माओवादियों ने हथियार डाले हैं। इनमें 1,496 ऐसे माओवादी शामिल हैं, जो संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वालों पर 25 हजार से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। अब तक प्रारंभिक सहायता के रूप में 5 करोड़ 64 लाख रुपये बांटे जा चुके हैं।

49.34 करोड़ का भुगतान अभी शेष

चर्चा के दौरान गृहमंत्री ने स्वीकार किया कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों की इनाम राशि का बड़ा हिस्सा यानी 49 करोड़ 34 लाख रुपये देना अभी शेष है। सरकार नियमानुसार इस राशि के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर रही है।

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प्रश्नकाल के दौरान उस समय स्थिति असहज हो गई जब विधायक विक्रम मंडावी ने सभापति धरमलाल कौशिक से चर्चा को आगे बढ़ाने की मांग की। मंडावी का तर्क था कि उनके मूल प्रश्न का लिखित उत्तर समय पर नहीं मिला और सत्र शुरू होने के मात्र 10 मिनट पहले अतिरिक्त जानकारी दी गई, जिससे वे तैयारी नहीं कर पाए।

इस पर गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि उत्तर में पारदर्शिता लाने के लिए अतिरिक्त जानकारी जोड़ी गई थी और वे चर्चा के लिए तैयार हैं। सभापति ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अतिरिक्त जानकारी के साथ भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं।



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