हेक्टेयर की जगह वर्गफीट में बांटा करोड़ों का मुआवजा, ढाई गुना बढ़ी लागत; अब EOW करेगा जांच

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March 1, 2026


भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजे देने में बड़ा खेल किया गया है। ग्रामीणों की जमीनों को हेक्टयेर की जगह वर्गफीट में नापकर करोड़ों का अधिक मुआवजा दिया गया …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 01 Mar 2026 11:07:16 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Mar 2026 11:16:14 AM (IST)

Bharatmala project Scam: हेक्टेयर की जगह वर्गफीट में बांटा करोड़ों का मुआवजा, ढाई गुना बढ़ी लागत; अब EOW करेगा जांच
भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाले में बड़े खेल का खुलासा ( सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीणों में बांटा गया अधिक मुआवजा
  2. हेक्टेयर के बजाय वर्गफीट में मापकर करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान
  3. अब प्रदेश में संचालित सभी परियोजनाओं की फाइलों की होगी जांच

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: प्रदेश के चर्चित भारतमाला मुआवजा घोटाले के जांच की फाइल अब ईओडब्ल्यू के हाथों में पहुंच गई है। जांच में अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीण भूमि को हेक्टेयर के बजाय वर्गफीट में मापकर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का मामला सामने आया है। इस हेरफेर की वजह से 15.20 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट का बजट ढाई गुना तक बढ़ गया था, जिसकी परतें अब जांच एजेंसी खोलने जा रही है।

भारतमाला परियोजना के तहत बिलासपुर से उरगा के बीच बन रही सड़क में मुआवज़ा वितरण को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि अधिकारियों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर कृषि भूमि का मुआवज़ा हेक्टेयर के बजाय वर्गफीट के व्यावसायिक रेट पर बांट दिया।

मामला तब और गंभीर हो गया जब एनएचएआई ने गड़बड़ी को पकड़ते हुए संभागायुक्त न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। एनएचएआई की आपत्ति के बाद ही यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ और प्रशासन में हड़कंप मच गया।

अब सभी परियोजनाओं की खुलेंगी फाइलें

अब ईओडब्ल्यू ने प्रदेश भर में संचालित उन सभी भारतमाला परियोजनाओं की फाइलें तलब की हैं, जहां मुआवज़ा वितरण में गड़बड़ी की आशंका है। जिला प्रशासन ने मांग के आधार पर बिलासपुर-उरगा प्रोजेक्ट से संबंधित तमाम दस्तावेज ईओडब्ल्यू को सौंप दिए हैं। जांच एजेंसी अब उन अधिकारियों और बिचौलियों की पहचान कर रही है जिन्होंने सरकारी खजाने को ढाई गुना चपत लगाकर चहेतों को फायदा पहुंचाया।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई रसूखदार चेहरों पर गाज गिर सकती है। ईओडब्ल्यू अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि यह खेल केवल बिलासपुर तक सीमित था या पूरे प्रदेश के अन्य प्रोजेक्ट्स में भी इसी तरह से कागजों में हेरफेर की गई है।

कैसे हुआ करोड़ों का वारा-न्यारा

मुआवज़ा वितरण के खेल में अधिकारियों ने जमीन की किस्म ही बदल दी। नियमानुसार जो मुआवज़ा हेक्टेयर कृषि भूमि के हिसाब से दिया जाना चाहिए था, उसे वर्गफीट व्यावसायिक के हिसाब से तय किया गया। इस छोटी सी कागजी अदला-बदली ने सरकार पर करोड़ों का अतिरिक्त बोझ डाल दिया था और प्रोजेक्ट की लागत को कई गुना बढ़ा दिया था।

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एनएचएआई की सतर्कता से खुला मामला

भारतमाला प्रोजेक्ट में बड़े घोटाले का पर्दाफाश भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सतर्कता से हुआ। भुगतान की जा रही भारी-भरकम राशि पर जब एनएचएआई को शक हुआ, तो उन्होंने भुगतान रोकने और जांच के लिए संभागायुक्त न्यायालय में याचिका लगाई। यहीं से फाइलों का वह सफर शुरू हुआ जो अब ईओडब्ल्यू की दहलीज तक पहुंच गया है।

ईओडब्ल्यू ने भारतमाला प्रोजेक्ट से संबंधित जो भी दस्तावेज और जानकारी मांगी थी, उन्हें संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जांच एजेंसी को सौंप दिया गया है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस पर आगे की कार्रवाई होगी।

-संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर



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