रायपुर में बंधक बनाकर मजदूरों से करवाया जा रहा था काम, विरोध करने पर दे देते थे नशे की दवाइयां

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July 11, 2025


रायपुर स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री और उमाश्री राइस मिल में मजदूरों को बंधक बनाकर उनसे काम करवाया जा रहा था। सूचना मिलने पर श्रम विभाग और पुलिस की टीन ने 150 से अधिक मजदूरों को रिहा करवाया है, जिसमें नाबालिग बच्चे भी शामिल है। ये सभी मजदूर दूसरे राज्यों से लाए गए है।

By Roman Tiwari

Publish Date: Fri, 11 Jul 2025 12:34:17 PM (IST)

Updated Date: Fri, 11 Jul 2025 12:43:03 PM (IST)

रायपुर में बंधक बनाकर मजदूरों से करवाया जा रहा था काम, विरोध करने पर दे देते थे नशे की दवाइयां
मजदूरों को इनडोर स्टेडियम में रखा गया

HighLights

  1. खाना देने के नाम पर मजदूरों से मारपीट
  2. पुलिस ने 150 से अधिक लोगों को छुड़ाया
  3. मजदूरों में नाबालिग बच्चे और महिलाएं भी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री और उमाश्री राइस मिल में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने का मामला सामने आया है। इनमें 10 से 12 साल के नाबालिग भी हैं। श्रम विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से दबिश देकर यहां काम करने वाले 100 से अधिक मजदूरों और 50 बच्चों (जो 10 से 16 साल की उम्र के थे) को रेस्क्यू किया है। इन सभी को फिलहाल इनडोर स्टेडियम में रखा गया है।

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जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री संचालक नितेश तिवारी, विपिन तिवारी और विकास तिवारी पर मजदूरों को बंधक बनाने का आरोप है। मजदूरों ने बताया कि इन लोगों ने उन्हें सुपरवाइजर और पैकेजिंग के काम के लिए बुलाया था। मजदूरों का कहना है कि संचालकों ने उन्हें पिछले पांच माह से वेतन का भुगतान नहीं किया है। उन्हें दिन में सिर्फ दो बार दोपहर तीन बजे और रात दो बजे, कच्चा खाना दिया जाता था।

दूसरे राज्यों से लाए गए थे मजदूर

जब मजदूर इसका विरोध करते थे, तो संचालक और अन्य लोग उन्हें नशे की दवाइयां देकर चुप करा देते थे। फैक्ट्री के अंदर मजदूरों से मारपीट करने के भी आरोप हैं। रेस्क्यू किए गए मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे बाहरी राज्यों के बताए जा रहे हैं।

फिलहाल इन सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। इसके बाद उनके आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों की भी जांच की जाएगी। विभाग अब स्वास्थ्य परीक्षण और पहचान सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई करेगा।

मामले को दबाने की कोशिश

इधर इनडोर स्टेडियम पहुंचकर संचालकों और उनके साथियों ने इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की। वे आनन-फानन में मजदूरों को स्टेडियम में पैसे देने लगे थे। वे किसी भी तरह से पैसे देकर मजदूरों को वहां से निकालना चाह रहे थे, लेकिन मीडिया की मौजूदगी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। अब श्रम विभाग ने संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ली है।

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बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष,वर्णिका शर्मा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मैं भी रेस्क्यू टीम में शामिल थी। बाल संरक्षण आयोग इस मामले का स्वतः संज्ञान लेगा। इसके बाद जांच-पड़ताल करके कार्रवाई की जाएगी।

लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें

यह कार्रवाई फैक्ट्री में बाल श्रम की लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद की गई है। जानकारी के अनुसार इन मजदूरों में माता-पिता और उनके बच्चे शामिल हैं, जो फैक्ट्री के भीतर ही रह रहे थे और स्कूल नहीं जा पा रहे थे।



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