New Religious Freedom Act will be implemented soon in Chhattisgarh | छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगा नया धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम: 10 राज्यों के अधिनियम की स्टडी हुई, गृहमंत्री ने 52 बैठक लेकर तैयार करवाया मसौदा; जल्द लगेगी मोहर – Raipur News

Author name

August 3, 2025


छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण-मतांतरण विवाद में मसीही समाज और हिंदू संगठनों का लगातार विवाद होने के बाद राज्य सरकार धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक बना रही है।

.

इस विधायक को विधानसभा सत्र के दौरान सार्वजनिक करके पारित किया जाएगा। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने इस संबंध में संकेत दिए है। नया विधेयक कब तक लागू होगा? इसमें क्या-क्या परिवर्तन? इसे बनाने के लिए कितनी बैठक हुई? पढ़े इस रिपोर्ट में…..

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी अन्य धर्म के अनुयायी की बातों या प्रभाव में आकर उस धर्म को अपनाते हैं और उसकी पूजा-पद्धतियों को मानकर स्वयं को उस धर्म का अनुयायी घोषित कर देते हैं।

अब इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी की जा रही है। अगर कोई व्यक्ति इस प्रस्तावित नियम के बाहर जाकर धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। साथ ही, यदि किसी पर दबाव बनाकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल राज्य का गृह विभाग अन्य राज्यों द्वारा बनाए गए ऐसे कानूनों का अध्ययन कर रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ में भी एक स्पष्ट और मजबूत नियम तैयार किया जा सके।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा जानकारी देते हुए।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा जानकारी देते हुए।

पहले पढ़े कितनी बैठकों का आयोजन करके तैयार किया गया मसौदा

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बताया, कि धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम को तैयार करने के लिए 52 से ज्यादा बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में दूसरे राज्यों में लागू अधिनियम के पक्ष रखे गए। संसोधन में क्या बदलाव होगा, इसकी चर्चा की गई। संसोधन में कानूनी पहलू क्या होगा? इस पर एक्सपर्ट से राय ली गई। मसौदा तैयार हो गया है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र की बैठक।

छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र की बैठक।

शीतकालीन विधानसभा सत्र में हो सकता है सार्वजनिक

बीजेपी और गृहमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार साय सरकार द्वारा तैयार संसोधित धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सार्वजनिक हो सकता है। विधानसभा में पेश करने से पहले मसौदा में मामूली संशोधन करने की बात विभागीय अधिकारियों ने दोहराई है।

10 राज्यों में लागू अधिनियम की स्टडी की

राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने के लिए अधिनियम का प्रारूप तैयार किया गया है। इस नए अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए ओडिशा, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, और कर्नाटक जैसे राज्यों में लागू कानून का अध्ययन किया गया।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा विभागीय अधिकारियों की बैठक लेते हुए।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा विभागीय अधिकारियों की बैठक लेते हुए।

नए कानून के लागू होते ही किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को सूचना देनी होगी। ड्राफ्ट में 17 महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं, जिसमें प्रलोभन या दबाव देकर धर्म बदलवाने पर सख्त सजा का प्रावधान रहेगा।

गृह विभाग ने बताया कि इसे विधानसभा में पेश करने से पहले कुछ संशोधन किया जाएगा। अधिनियम का उद्देश्य धर्मांतरण प्रक्रिया को नियमबद्ध और पारदर्शी बनाना है ताकि किसी भी तरह का दुरुपयोग रोका जा सके।

नए कानून में होगा ये सब

धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित अधिनियम का प्रारूप पांच पेज का है, जिसमें 17 से अधिक बिंदुओं पर विचार चल रहा है। यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले अपना व्यक्तिगत विवरण भरकर एक निर्धारित फॉर्म जमा करना होगा।

यह फॉर्म संबंधित जिले के प्रशासनिक कार्यालय में देना अनिवार्य होगा। प्रशासन द्वारा फॉर्म प्राप्त होने के बाद पुलिस विभाग को सूचना दी जाएगी, जो धर्म परिवर्तन के कारणों की जांच करेगा। यदि मामला संदिग्ध पाया गया, तो गहन जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मतांतरित को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

जैसे अनुसूचित जाति के धर्मांतरण करने वाले लोग आरक्षण और अन्य सरकारी लाभों से वंचित रहते हैं, वैसे ही अब अनुसूचित जनजाति के मतांतरित लोगों को भी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा। प्रस्तावित कानून में इस व्यवस्था को शामिल किया गया है।

तो धर्मांतरण होगा अवैध

ड्राफ्ट के अनुसार यदि प्रलोभन, बल, विवाह या कपटपूर्ण तरीके से किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है, तो धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। साथ ही धर्मांतरण के बाद, व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर एक और डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा।

इसका सत्यापन कराने के लिए उसे स्वयं जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ेगा। धर्मांतरण के बाद व्यक्ति यदि इस नियम का पालन नहीं करता, तो जिला प्रशासन के अधिकारी उसके धर्मांतरण को अवैध करार दे सकते हैं।

परिजनों की आपत्ति पर अदालत में होगी सुनवाई

धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति की जब तक वैरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक जिला प्रशासन नोटिस बोर्ड पर डिक्लेरेशन फॉर्म की एक प्रति प्रदर्शित करेगा। धर्मांतरण करने वाले के परिजनों की अगर आपत्ति है, तो वे FIR दर्ज करवा सकेंगे। यह मामला गैर-जमानती होगा और सुनवाई सत्र अदालत में होगी।

कानून के उल्लंघन पर होगी 10 साल की सजा

नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने का दोषी पाए जाने पर कम से कम 2 साल और अधिकतम 10 साल की जेल होगी। साथ ही न्यूनतम 25,000 रुपए का जुर्माना लगेगा।

अवैध तरीके से सामूहिक धर्म परिवर्तन में दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की सजा और 50,000 रुपए जुर्माना होगा।

कोर्ट धर्म परिवर्तन के पीड़ित को 5 लाख रुपए तक का मुआवजा भी मंजूर कर सकता है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि धर्मांतरण अवैध नहीं था, यह साबित करने की जिम्मेदारी, धर्मांतरण करने वाले और कराने वाले व्यक्ति की होगी।

क्या है धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम

इस अधिनियम के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है। इस स्वतंत्रता को लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता है। धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का अभ्यास करने और उसका पालन करने का अधिकार है।

अब पढ़े क्यो जरूी है सख्त नियम

केस:1- धर्मांतरण के दबाव में किया सुसाइड

7 दिसंबर 2024 को धमतरी जिले के पाटियाडीह गांव (अर्जुनी थाना क्षेत्र) में एक युवक ने आत्महत्या कर ली। मृतक लीनेश साहू (30), जो टेलरिंग का कार्य करता था, ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।

आत्महत्या से पहले उसने वॉट्सऐप स्टेटस में लिखा, “पत्नी से परेशान हूं, सास-ससुर और साली धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाल रहे हैं।” परिजन जब कमरे में पहुंचे तो लीनेश फंदे पर लटका मिला। तुरंत पुलिस को सूचित किया गया। मामले की जांच की जा रही है और परिवार वालों के बयान लिए जा रहे हैं।

केस–2: बालोद में युवक ने किया सुसाइड

20 दिसंबर 2024 को बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र में गजेंद्र उर्फ सूरज देवांगन (35) नामक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले सूरज ने थाने में शिकायत दी थी कि उसकी पत्नी राकेश्वरी देवांगन ईसाई धर्म अपना चुकी है।

वो उस पर भी धर्म बदलने का दबाव बना रही है। सूरज ने आरोप लगाया कि पत्नी, सास और ससुर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। कमरे की दीवार पर भी उसने यही बातें लिखी थीं। परिजनों का कहना है कि ससुराल पक्ष द्वारा लगातार धर्मांतरण का दबाव डाला जा रहा था।

अब पढ़े कितनी बार हुआ है विवाद

अब पढ़े कितने FIR दर्ज हुई



Source link