छात्राओं से छेड़छाड़ और Bad Touch करने वाले शिक्षक को Chhattisgarh HC से नहीं मिली राहत, सजा बरकरार

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August 28, 2025


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्कूल की छात्राओं के साथ छेड़छाड़ बैड टच के आरोपी शिक्षक की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने मामले में फास्ट-ट्रैक पाक्सो अदालत का फैसला बरकरार रखा है। साथ ही अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि शिक्षक का पद जिम्मेदारी और विश्वास का होता है।

Publish Date: Thu, 28 Aug 2025 03:00:11 PM (IST)

Updated Date: Thu, 28 Aug 2025 03:04:56 PM (IST)

छात्राओं से छेड़छाड़ और Bad Touch करने वाले शिक्षक को Chhattisgarh HC से नहीं मिली राहत, सजा बरकरार
पोक्सो एक्ट में आरोपी शिक्षक की हाई कोर्ट में याचिका खारिज

HighLights

  1. छात्राओं ने छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षक की याचिका खारिज
  2. पोक्सो कोर्ट ने दी थी 2 साल 2 महीने 6 दिन जुर्माने का सजा
  3. हाई कोर्ट ने कहा- शिक्षक का पद विश्वास और जिम्मेदारी का

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुंगेली जिले के बरेला सरकारी स्कूल के शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा की अपील खारिज कर दी है। पाक्सो कोर्ट ने उन्हें नाबालिग छात्राओं से छेड़खानी और बैड टच करने के आरोप में 2 साल 2 महीने 6 दिन की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

मामला वर्ष 2019 का है। बता दें कि आरोपी शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त थे, लेकिन बिना अनुमति सातवीं कक्षा में जाकर विज्ञान पढ़ाते थे। इसी दौरान उन्होंने छात्राओं के साथ अनुचित हरकतें कीं। छात्राओं ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने बीईओ प्रतिभा मंडलोई को जांच की जिम्मेदारी दी थी।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शिक्षक क्लास के दौरान छात्राओं के रीढ़ और छाती सहित अन्य हिस्सों को छूते थे। साथ ही स्कूल परिसर में गुटखा और गुड़ाखू का सेवन भी करते थे। आरोपों की पुष्टि के बाद पुलिस ने एफआइआर दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार किया। मामला फास्ट-ट्रैक पाक्सो कोर्ट में चला, जहां 2 मार्च 2022 को सजा सुनाई गई थी।

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शिक्षक का पद विश्वास व जिम्मेदारी का: हाई कोर्ट

शर्मा ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और खुद को निर्दोष बताते हुए साजिश का शिकार बताया। हाई कोर्ट ने छात्राओं की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक का पद विश्वास और जिम्मेदारी का होता है, ऐसे अपराध केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि पाक्सो एक्ट के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है।



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