Raipur’s role in this ‘epoch-making event’ in the history of agricultural development | अनकही: कृषि विकास के इतिहास की ‘युगान्तरकारी घटना’ में रायपुर की भूमिका – Raipur News

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September 20, 2025


उस दिन रायपुर शहर में बहुत गहमा-गहमी थी। पहला कारण तो यह था कि केन्द्र के कृषि मंत्री एस.के.पाटिल और तत्कालीन मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री वी.वी. द्रविड़ हवाई जहाज से रायपुर आने वाले थे। इससे भी बड़ी बात यह थी कि उसी दिन भारत में अमेरिका के राजदूत जॉन केन

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यह हरित क्रांति की भूमिका थी

सन् 1960-61 में लागू गहन कृषि जिला विकास कार्यक्रम को विशेषज्ञों ने कृषि विकास के इतिहास की एक ‘युगांतरकारी घटना‘ के रूप में स्वीकार किया है। इस कार्यक्रम को ‘युगांतरकारी‘ माना गया क्योंकि इसके लागू करने से खाद्यान्न की पैदावार बढ़ाने में नए कीर्तिमान स्थापित हुए और कुछ वर्षों बाद इसी कार्यक्रम के विस्तृत, महत्वाकांक्षी और उन्नत प्रयास के रूप में भारत में हरितक्रांति का अभियान शुरू हुआ।

इसलिए चुना गया रायपुर को

दिलचस्प बात यह है कि रायपुर का चयन इसलिए किया गया था कि रायपुर शहर के निकट 1903 में एक प्रायोगिक कृषि फार्म की स्थापना की गई थी जो 127 एकड़ में फैला था। बाद में इसी प्रायोगिक फार्म को 1908 में चावल अनुसंधान केन्द्र के रूप में उन्नत किया गया। और उसका क्षेत्र 229 एकड़ कर दिया गया। इस पृष्ठभूमि में और रायपुर की मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था तथा सहकारी संस्थाओं की क्षमता को देखकर यहां गहन कृषि जिला कार्यक्रम लागू किया गया। इन दो संस्थाओं के कारण रायपुर जिले में कृषि के क्षेत्र में शोध और विकास की संभावनाएं बहुत अधिक थी। यह याद रखने की बात है कि इसी क्रम में एक बड़ी पहल के रूप में 1961 में रायपुर में कृषि महाविद्यालय स्थापित किया गया। इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर साकार करने का दायित्व कृषि विभाग का था किंतु कार्यक्रम की मानीटरिंग करने और उसके क्रियान्वयन को सुचारू बनाने का पूरा जिम्मा कलेक्टर को सौंपा गया।

मांग बढ़ रही थी, उत्पादन नहीं

उल्लेखनीय है कि उस समय देश में खाद्यान्न की मांग तो लगातार बढ़ रही थी किंतु उत्पादन में वृद्धि नहीं हो रही थी। इस स्थिति का सामना करने के लिए उन्नत बीज, उर्वरक, पौध संरक्षक दवाएं, कृषि के उन्नत यंत्र और उपकरण तथा सरलता से कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए एक एकीकृत, ठोस और प्रभावी कार्यक्रम लागू करना जरूरी समझा गया। और पहले यह तय किया गया कि ऐसे कार्यक्रम को प्रायोगिक तौर पर पहले देश के चुने हुए सात जिलों में लागू किया जाये। इस कार्यक्रम का नाम ‘‘गहन कृषि जिला कार्यक्रम‘‘ रखा गया। यह एक ऐतिहासिक संयोग था कि रायपुर जिले को देश के उन चुनिंदा सात जिलों में शामिल किया गया जहां प्रायोगिक तौर पर इस कार्यक्रम को लागू किया जाना था। यह कार्यक्रम अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन की सहायता, भारत सरकार तथा राज्य सरकार के योगदान से संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा था। अमेरिकी राजदूत और भारत तथा मध्यप्रदेश के मंत्रियों तथा विशेषज्ञों ने जिले का दौरा किया और बाद में एक पत्रकार वार्ता कर गहन कृषि जिला कार्यक्रम की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया था।

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