CGPSC अभ्यर्थियों का अनोखा केस, छत्तीसगढ़ HC ने गर्भवती पत्नी के पक्ष में सुनाया फैसला, जानें पूरा मामला

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September 26, 2025


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बुधवार को एक अनोखा मामला सुनने को मिला। बहतराई निवासी 30 वर्षीय पीएससी अभ्यर्थी पति ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी पत्नी, जो स्वयं भी पीएससी अभ्यर्थी और तीन माह की गर्भवती है, उनको उसके माता-पिता जबरन अपने साथ ले गए हैं।

Publish Date: Fri, 26 Sep 2025 07:37:39 AM (IST)

Updated Date: Fri, 26 Sep 2025 07:53:13 AM (IST)

CGPSC अभ्यर्थियों का अनोखा केस, छत्तीसगढ़ HC ने गर्भवती पत्नी के पक्ष में सुनाया फैसला, जानें पूरा मामला
छत्तीसगढ़ HC ने गर्भवती पत्नी के पक्ष में सुनाया फैसला

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बुधवार को एक अनोखा मामला सुनने को मिला। बहतराई निवासी 30 वर्षीय पीएससी अभ्यर्थी पति ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी पत्नी, जो स्वयं भी पीएससी अभ्यर्थी और तीन माह की गर्भवती है, उनको उसके माता-पिता जबरन अपने साथ ले गए हैं। उसने अवैध गर्भपात के खतरे की भी आशंका जताई। हालांकि, अदालत में पेश हुई पत्नी ने अपने माता-पिता संग रहने की इच्छा जाहिर की। इसके आधार पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने पति की याचिका खारिज कर दी।

प्रेम विवाह से शुरू हुआ विवाद

याचिकाकर्ता पति ने बताया कि वह और उसकी पत्नी लंबे समय से बिलासपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान दोनों में प्रेम संबंध बने और 28 अगस्त 2025 को विवाह कर लिया। विवाह के बाद पत्नी बहतराई स्थित घर में पति और उसके परिवार के साथ रहने लगी। लेकिन अलग जाति में विवाह होने से पत्नी का परिवार नाराज था।

कार से ले गए और काट दिया संपर्क

पति का आरोप है कि 7 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे पत्नी के स्वजन सफेद एर्टिगा कार में आए और मिलने के बहाने उसे जबरन ले गए। इसके बाद से पत्नी का संपर्क पूरी तरह टूट गया। पति ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पत्नी बोली- मैं माता-पिता के साथ रहना चाहती हूं

हाई कोर्ट की सुनवाई में शासकीय अधिवक्ता ने पत्नी का शपथपत्र पेश किया। इसमें उसने साफ लिखा कि वह स्वेच्छा से अपने माता-पिता के साथ रह रही है और पति के घर लौटना नहीं चाहती। अदालत में मौखिक बयान भी इसी तरह का रहा।



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