तस्वीर रायपुर की है जहां मंगलवार दोपहर को तेज बारिश हुई थी।
छत्तीसगढ़ में आज से अगले 3 दिनों तक तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है, जिससे प्रदेश में वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है।
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इस बीच, मौसम विभाग ने बेमेतरा, दुर्ग, रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार को छोड़कर राज्य के बाकी सभी जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं 28 जिलों में आज गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।
बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा नारायणपुर में 20 मिमी दर्ज की गई।
रायपुर में मंगलवार सुबह से तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। हालांकि, दोपहर बाद बादल छाने लगे और कुछ इलाकों में तेज बारिश देखने को मिली। इसके बाद देर रात गरज-चमक के साथ कई इलाकों में फिर बारिश हुई।

देखिए तस्वीरें-

रायपुर में मंगलवार को दोपहर 3 बजे के बाद तेज बारिश हुई।

रायपुर में मंगलवार को सुबह से धूप छाई हुई थी। दोपहर के बाद अचानक मौसम बदला।
बेमेतरा में सबसे कम बरसा पानी
प्रदेश में अब तक 1167.4 मिमी औसत बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 524.5 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 50% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1520.9 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 52% ज्यादा है।

जानिए क्यों होती है खंड वर्षा
- स्थानीय बादल बनना – जब किसी छोटे इलाके में ज्यादा गर्मी से पानी भाप बनकर ऊपर जाता है और जल्दी ठंडा होकर बादल बनाता है, तो वहीं बारिश हो जाती है। पास के इलाके में अगर हवा और तापमान अलग हो तो वहां बारिश नहीं होती।
- भू-आकृति (टोपोग्राफी) – पहाड़, नदी या जंगल वाले क्षेत्र में हवा की नमी फंस जाती है और बारिश करा देती है, जबकि बगल का इलाका सूखा रह सकता है।
- हवा की दिशा – हवा अगर किसी खास जगह नमी लेकर रुक जाए या घूम जाए तो उसी जगह पर बरसात होती है, आस-पास सूखा रह सकता है।
- तापमान और नमी का अंतर – किसी छोटे इलाके में अगर नमी ज्यादा है और तापमान तेजी से बदलता है तो वहीं बादल फट कर बारिश कर देता है।


जानिए क्यों गिरती है बिजली
बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है।
आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।


