छत्तीसगढ़ के 3 जिलों के किसानों को मिलेगा पीएम धन्य-धान्य और दलहन आत्मनिर्भरता योजना का लाभ

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October 13, 2025


छत्तीसगढ़ के जशपुर, दंतेवाड़ा और कोबरा जिलों को दो नई केंद्रीय कृषि योजनाओं से जोड़ा गया है। इन जिलों को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में जोड़ा गया है। कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में सीएम वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने किसानों को ट्रैक्टर, उपकरणों की चाबियां व अनुदान राशि के चेक वितरित किए।

Publish Date: Sun, 12 Oct 2025 08:34:52 AM (IST)

Updated Date: Sun, 12 Oct 2025 08:38:57 AM (IST)

छत्तीसगढ़ के 3 जिलों के किसानों को मिलेगा पीएम धन्य-धान्य और दलहन आत्मनिर्भरता योजना का लाभ
जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा में चलेगी केंद्र की कृषि योजनाएं

HighLights

  1. जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा में चलेगी केंद्र की दो नई अन्य योजनाएं
  2. सीए साय ने किसानों को ट्रैक्टर व अनुदान राशि के चेक वितरित किए
  3. कोरबा में नई सिंचाई परियोजनाओं से गर्मी के मौसम में भी खेती होगी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में केंद्र सरकार ने राज्य के जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा जिला को शामिल किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से राज्य की खेती-किसानी की दिशा बदलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम में सीएम भी वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने किसानों को ट्रैक्टर, उपकरणों की चाबियां व अनुदान राशि के चेक वितरित किए।

दंतेवाड़ा: जैविक विधि से और बढ़ेगी सुगंधा की महक

दंतेवाड़ा सिर्फ जैविक जिला नहीं, बल्कि सुगंधा धान की नई पहचान बनता जा रहा है। किसान जैविक पद्धति के साथ-साथ श्री विधि और कतार रोपा विधि जैसी तकनीकों से खेती को और उन्नत बना रहे हैं। उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। अब जब यह जिला केंद्र सरकार की योजना में शामिल हो गया है, तो यहां के किसानों की ‘सुगंधा धान’ की महक पूरे देश में फैलने को तैयार है।

जशपुर: कैश क्राप की राजधानी बनने की ओर

जशपुर जिला पहले से ही टमाटर, मिर्च और आलू के बंपर उत्पादन के लिए जाना जाता है। प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी के कारण किसानों को अब तक पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। पत्थलगांव ब्लॉक के लुड़ेग में टमाटर और लोरो (बगीचा ब्लॉक) में मिर्च प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई हैं, मगर अभी इनसे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। 2015 में पत्थलगांव के किसानों ने टमाटर के 25 पैसे किलो दर मिलने पर पूरी फसल सड़क पर फेंक दी थी। उम्मीद है आय में स्थिरता आएगी।



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