गरियाबंद जिले के देवभोग में आयोजित सांसद खेल महोत्सव में बजट के अभाव के कारण अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। शून्य बजट के बावजूद 17 संकुलों, शासकीय महाविद्यालय और दो नगरीय निकायों से कुल 1100 छात्रों ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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अधिकारियों को व्यवस्थाएं जुटाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। एसडीएम आरएस सोरी, सीईओ बगतीश भगत, मुख्य नगरपालिका अधिकारी दुष्यंत साहू और बीईओ विनय पटेल की मौजूदगी में खेल प्रारंभ हुए।
आयोजन में परिवहन खर्च कम करने के लिए खिलाड़ियों को मालवाहकों में भरकर लाया गया। छात्रों और खिलाड़ियों के लिए पैक्ड पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। उन्हें स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप से पानी पीना पड़ा, जो पीने योग्य नहीं था।

ग्लूकोज और ऑरेंज कैंडी भी उपलब्ध नहीं
खेल समाप्त होने के बाद भी खिलाड़ियों को पीने के पानी के लिए खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी। आवश्यक सामग्री जैसे ग्लूकोज और ऑरेंज कैंडी भी उपलब्ध नहीं थी। भोजन के लिए पहले सरकारी चावल का उपयोग करने का प्रयास किया गया।
लेकिन बाद में कुछ शिक्षकों की मांग पर प्रीमियम चावल की व्यवस्था की गई। सरकारी रसोइयों पर निर्भरता के कारण भोजन तैयार होने में देरी हुई, जिसके बाद अतिरिक्त रसोइयों का इंतजाम किया गया। खिलाड़ियों को दोपहर 2 बजे के बाद भोजन परोसा गया।
मूलभूत सुविधाओं में भी कटौती
जिसमें बजट की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। मैदान तैयार करने के लिए चूने की कमी भी आयोजन में साफ झलक रही थी। जिले भर में हो रहे इन आयोजनों में बजट की कमी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
जिससे मूलभूत सुविधाओं में भी कटौती करनी पड़ रही है। इन सभी अव्यवस्थाओं के बावजूद, खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। 19 सेक्टरों से आए 1100 छात्रों ने मैदान को खचाखच भर दिया और खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

पहले दिन 50% खेल संपन्न
दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन 50% खेल सफलतापूर्वक संपन्न हो गए। इस आयोजन में अंतर संकुल स्तर से चयनित खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। खेल संचालन की जिम्मेदारी 35 महिला-पुरुष शिक्षकों को सौंपी गई है, जो व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चला रहे हैं।
बीईओ पटेल ने जानकारी दी कि ब्लॉक स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं 16 अक्टूबर तक चलेंगी। यहां से चयनित खिलाड़ी विधानसभा स्तर की प्रतियोगिता में 11 से 13 नवंबर तक भाग लेंगे।

फ्लेक्स में बड़े चेहरे, लेकिन फंड का अभाव
आयोजन के फ्लेक्स में प्रधानमंत्री और सांसद के बड़े-बड़े फोटो लगाए गए हैं, जिससे यह आभास होता है कि आयोजन को भरपूर बजट मिला होगा। लेकिन हकीकत इसके उलट है। अब तक इस आयोजन के लिए किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं मिली है।
विभागों को सौंपी गई अलग-अलग जिम्मेदारियां
इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए जिले भर में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। कलेक्टर के निर्देश पर विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। जनपद पंचायत को खेल आयोजन का नोडल विभाग बनाया गया है। जबकि एसडीएम मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी और खंड स्रोत समन्वयक को भी प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। देवभोग जनपद के सीईओ बी. भगत ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अन्य विभागों के समन्वय से यह आयोजन कराया जा रहा है। फिलहाल कोई बजट नहीं मिला है, लेकिन संभावना है कि आगे चलकर बजट जारी हो सकता है।
प्रतिभाओं को मंच देने की पहल
हालांकि, संसाधनों की कमी के बावजूद खेल आयोजन में कोई कमी नहीं आने दी जा रही है। बच्चों में उत्साह देखने लायक है। सांसद खेल महोत्सव का उद्देश्य स्कूली प्रतिभाओं को मंच देना और राष्ट्र की खेल संस्कृति को सुदृढ़ करना बताया गया है, जो बिना बजट के भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।