दिवाली से पहले बाजारों में मिठाइयों और फूड प्रोडक्ट्स की ब्रिक्री शुरू हो गई है। लेकिन त्योहार में अधिक मुनाफा कमाने के लालच में कुछ लोग सिंथेटिक और मिलावटी प्रोडक्ट को भी बड़ी मात्रा में बेचते हैं। इसे खाने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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अकेले रायपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस साल नकली पनीर की फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर 8,000 किलो से अधिक नकली पनीर जब्त किया है। वहीं, मिठाई और अन्य फूड प्रोडक्ट्स में मिलावट की शिकायतें मिल रही हैं। आइए जानेंगे की कैसे घर बैठे आप असली और नकली फूड प्रोडक्ट की पहचान कर सकते हैं।
पहले देखिए ये तस्वीरें-

खाद्य विभाग मिठाई और अन्य फूड प्रोडक्ट्स की जांच में जुटा हुआ है।

दिवाली से पहले खोवे की मिठाइयों में मिलावट की शिकायतें मिल रही है।

खाद्य विभाग की टीम अलर्ट मोड पर है। दुकानों में जाकर सैंपल लिए जा रहे हैं।
अब जानते हैं कि फूड डिपार्टमेंट ने नकली पनीर के खिलाफ क्या कार्रवाई की, और छापेमारी में क्या-क्या सामने आया। इन 2 अहम केस रिपोर्ट में पढ़िए-
केस 1
तीन महीने पहले 31 जुलाई को रायपुर में फूड डिपार्टमेंट की टीम ने शहर के भाठागांव इलाके में चल रही नकली पनीर फैक्ट्री पर छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान करीब 700 किलो नकली पनीर जब्त किया गया।
मिलावटी पनीर सस्ते पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से तैयार किया जा रहा था। फैक्ट्री का संचालन मध्य प्रदेश मुरैना निवासी हुकुमचंद बंसल और उनके बेटे अंकुर बंसल कर रहे थे।

शंकर नगर इलाके में नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री (फाइल)
केस 2
इस कार्रवाई के 5 दिनों के बाद ही 5 अगस्त को फूड डिपार्टमेंट ने शंकर नगर कॉलोनी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रेड कर नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा किया था। यह फ्रैक्टरी नाले के ऊपर संचालित हो रही थी।
अधिकारियों ने पाया कि पनीर गंदगी के बीच मरी हुई मक्खियों वाले पानी में पाम ऑयल और फैट से तैयार किया जा रहा था। नकली पनीर यूनिट के संचालक के रामानंद बाघ हैं। यहां से 300 किलों से अधिक पनीर जब्त किया गया था।

मरी हुई मक्खियों वाले पानी में बन रहा नकली पनीर। (फाइल)
रायपुर में 8000 किलो से ज्यादा पनीर जब्त
रायपुर के ही ये दो मामले हैं। जिनमें फूड डिपार्टमेंट ने कार्रवाई की है। अकेले रायपुर में ही नकली पनीर की फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर 8,000 किलो से ज्यादा नकली पनीर जब्त किया है। त्यौहारों में दूध से बने प्रोडक्ट्स और दूसरे खाने-पीने की चीजों की डिमांड बढ़ जाती है।
केवल पनीर ही नहीं बल्कि दूसरे फूड प्रोडक्ट्स में भी ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में कुछ लोग सिंथेटिक और मिलावटी सामान त्यौहार में खापा देते हैं। सबसे ज्यादा मिलावट या नकली फूड प्रोडक्ट्स बेचे जाने की शिकायतें भी त्यौहारों के सीजन में आती हैं। इसलिए हम आपको बताएंगे की असली और नकली फूड प्रोडक्ट्स को कैसे पहचानें।
मिलावटी पनीर की जांच कैसे करें नकली पनीर बनाने खराब दूध, आटा, मैदा, अरारोट, पाम ऑयल, मिल्क पाउडर का इस्तेमाल होता है। ये सभी चीजें शरीर के लिए नुकसानदायक है।
जांच का तरीका- एक बर्तन में थोड़ा पनीर का टुकड़ा ले और उसे पानी में मिलाएं और उसमें टिंचर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालें। अगर पनीर बैंगनी रंग का हो जाए, तो इसमें मिलावट है। और अगर पनीर का रंग पीला होता है तो वह शुद्ध पनीर रहेगा।

क्या होता है एनालॉग चीज, क्यों है ये खतरनाक?
एनालॉग चीज असली दूध से नहीं बल्कि सस्ते क्वॉलिटी के पाम ऑयल, फैट और दूध पाउडर को मिलाकर तैयार किया जाता है। यह दिखने में पनीर जैसा होता है, लेकिन इसका कोई पोषण असली पनीर की तरह नहीं होता। लगातार सेवन करने पर यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है।
भारत में एनालॉग पनीर बेचना वैसे तो लीगल है, लेकिन इसे डेयरी प्रोडक्ट या पनीर के नाम पर बेचना गलत है। पैकेट पर एनालॉग पनीर लिखा होना जरूरी है। एनालॉग पनीर में सामान्य पनीर से ज्यादा सैचुरेटड फैट होते हैं। सस्ता होने के कारण यह होटलों और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किया जाता है।

उपभोक्ता इन बातों का रखें ध्यान
- खुले में बिकने वाले पनीर से बचें।
- ब्रांडेड पैकिंग वाला, जानकारी युक्त पनीर ही खरीदें।
- रेस्टोरेंट्स में पनीर ऑर्डर करने से पहले जानकारी लें।
- अगर आपको नकली पनीर की शंका हो तो खाद्य विभाग में शिकायत करें।

मिलावटी खोया और मिठाई की पहचान कैसे करें?
सस्ता और नकली खोया बनाने में खराब क्वॉलिटी का मिल्क पाउडर, मैदा, अरारोट और स्टार्च जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। यह खोया देखने में असली लगता है, लेकिन स्वाद और उसकी पौष्टिकता में कमी रहती है। मिलावटी खोया से कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
स्टार्च और अरारोट से बना खोया पेट दर्द, अपच, एसिडिटी और डायरिया (दस्त) का कारण बन सकता है। साख ही सिंथेटिक दूध और यूरिया वाले मिलावटी खोया के सेवन से लीवर और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।


असली और नकली दूध की पहचान
दूध में पानी मिलाने की खबरें मिलती थीं, लेकिन पिछले कुछ सालों को गाढ़ा दिखाने के लिए उसमें अरारोट या स्टार्च मिलाया जाता है। साथ ही दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए पानी की बजाय उसमें यूरिया, डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, माल्टोडेक्सट्रिन पाउडर की मात्रा बढ़ी है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है।
जांच का तरीका- दूध को हल्का गर्म करें और उसमें टिंचर आयोडीन (Tincture Iodine) की कुछ बूंदें डालें। अगर दूध में स्टार्च या अरारोट मिला है, तो उसका रंग नीला या बैंगनी (Violet) हो जाएगा। अगर दूध का रंग नहीं बदलता है तो वह शुद्ध है।

मिठाई की सजावट भी नकली खोया-दूध तो मिलावट के घेरे में रहता ही है। मिठाइयों को सजाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिल्वर फॉइल यानी चांदी का वर्क भी मिलावटियों से नहीं बच पाया है। वे चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल लगाकर देते हैं।

नकली फूड कलर
त्योहारी सीजन में बाजार में बिकने वाली रंगीन मिठाइयों में अक्सर सिंथेटिक या नकली फूड कलर मिलाए जाते हैं। नकली फूड कलर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

मिठाई और अन्य फूड प्रोडक्ट के साथ ही मसालों में चाक, मिट्टी, ईंट का पाउडर जैसी मिलावट होने की संभावना बढ़ जाती है।




यहां करें शिकायत
सबसे पहले दुकानदार को मिलावट फूड प्रोडक्ट होने के बारे में बताएं और उसे वापस करने की कोशिश करें। अगर वह इनकार करे या बहाना बनाए तो ग्राहक दुकानदार के खिलाफ सीधी शिकायत कर सकता है।
इसके लिए FSSAI के टोल फ्री नंबर 1800112100 या इसकी वेबसाइट https://foscos.fssai.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के हेल्पलाइन नंबर 9340597097 सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक शिकायत कर सकते हैं। ……………………………… इस तरह की और भी खबर पढ़िए
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मिलावटी पनीर का धंधा बड़े पैमाने पर फैल चुका है। शहर की कई छोटी फैक्ट्रियों और दूध यूनिट्स में स्किम्ड मिल्क पाउडर से पनीर तैयार किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि तेल, यूरिया, कास्टिक सोडा और चीनी मिलाकर नकली दूध बनाया जा रहा है। शहर के कई होटल-रेस्टोरेंट्स में इसकी सप्लाई हो रही है। पढ़ें पूरी खबर