Questions over the death of tigress Bijli | बाघिन बिजली की मौत पर सवाल: विभाग ने इलाज में लापरवाही बरती, अंतिम संस्कार की तस्वीर तक नहीं आई; महंत ने राज्यपाल को लिखा पत्र – Raipur News

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October 19, 2025


रायपुर से ले जाने की पहले की तस्वीर।

नवा रायपुर स्थित एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी में युवा बाघिन ‘बिजली’ की मौत के बाद वन विभाग और सफारी पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से अंबानी के वनतारा में बिजली का अंतिम संस्कार कर दिया।

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लेकिन आठ दिन बाद भी अंतिम संस्कार की एक तस्वीर तक जारी नहीं की गई है। न ही अधिकारियों ने वापस लौटने के बाद बिजली की मौत के संबंध ट्रांसपेरेंसी के साथ कोई बात रखी। मौत की खबर भी 10 अक्टूबर को वनतारा के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पेज से मिली थी। वन-विभाग ने अपनी ओर से कुछ नहीं बताया।

अब इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सीनियर नेता चरणदास महंत ने राज्यपाल को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने जंगल सफारी के उच्च अधिकारियों और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ये बिजली की जामनगर शिफ्ट करने के बाद की तस्वीर है।

ये बिजली की जामनगर शिफ्ट करने के बाद की तस्वीर है।

देखभाल और इलाज में लापरवाही का आरोप

महंत ने अपने पत्र में जंगल सफारी में वन्यजीवों की देखभाल और इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण युवा बाघिन “बिजली” की असमय मृत्यु हुई।

महंत ने खुलासा किया कि:​ बाघिन ‘बिजली’ ने फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया था। ​इनमें से एक शावक मृत पैदा हुआ और दूसरा भी कुछ ही दिनों बाद अस्वस्थ होकर मर गया।

नहीं मिला सही इलाज

महंत ने राज्यपाल को बताया है कि गर्भावस्था के दौरान ही बाघिन की तबीयत खराब रहने लगी थी, लेकिन मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन और जंगल सफारी के संचालक की उपेक्षा और अनुभवहीन डॉक्टरों के कारण उसका इलाज सही तरीके से नहीं हो सका।

ये तस्वीर वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू रिहेबलिटेशन सेंटर की है।

ये तस्वीर वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू रिहेबलिटेशन सेंटर की है।

हमारे यहां के डॉक्टर ​बीमारी तक नहीं पहचान सके

​जब बाघिन की हालत बिगड़ी और उसने खाना-पीना छोड़ा, तब जाकर उसे गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा रिसर्च इंस्टिट्यूट भेजा गया। ​महंत के अनुसार, वनतारा के डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि जंगल सफारी के डॉक्टर बाघिन की बीमारी को पहचान ही नहीं पाए और गलत इलाज करते रहे।

​वनतारा के डॉक्टरों ने यह भी संकेत दिया कि अगर बाघिन को समय रहते भेजा जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

बाघिन बिजली की मौत से कुछ घंटे पहले की तस्वीर।

बाघिन बिजली की मौत से कुछ घंटे पहले की तस्वीर।

​सोनोग्राफी मशीन, पर तकनीशियन नहीं

जंगल सफारी के डॉक्टरों ने खुद यह स्वीकार किया कि सफारी में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद उसे चलाने वाला तकनीशियन मौजूद नहीं था। इस कारण बाघिन की महत्वपूर्ण जांच नहीं हो सकी और बीमारी का सही कारण समय पर पता नहीं चल पाया।

​भाजपा सरकार और वन विभाग पर आरोप

​नेता प्रतिपक्ष महंत ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है, तब से जंगल सफारी में कई वन्यजीवों की अकाल मृत्यु हो चुकी है। ​उन्होंने दावा किया कि वन विभाग कुप्रबंधन दूर करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

पशु चिकित्सा के 20 पद लेकिन 18 खाली

महंत ने यह भी बताया कि वन्यजीवों की देखभाल के लिए 20 पशु चिकित्सक पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से 18 पद लंबे समय से रिक्त हैं। ​चरणदास महंत ने राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है।

​महंत ने मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन, जंगल सफारी के डायरेक्टर और संबंधित चिकित्सक को तत्काल निलंबित या कार्य से पृथक किया जाए।

चरण दास महंत का पत्र।

चरण दास महंत का पत्र।

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट भी उठा चुके हैं सवाल

इससे पहले वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने अब इस पूरे मामले में सवाल उठाया था। उनका कहना था कि जल्दी एक्शन लेते तो शायद बाघिन की जान बच जाती।

बता दें कि बाघिन के यूट्रस-ओरल में इन्फेक्शन था। 7 अक्टूबर को उसे बेहतर इलाज के लिए वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू रिहेबलिटेशन सेंटर भेजा गया था, वह 9 अक्टूबर की रात गुजरात पहुंची थी।

वनतारा एडमिनिस्ट्रेशन ने बाघिन की मौत की जानकारी दी है।

वनतारा एडमिनिस्ट्रेशन ने बाघिन की मौत की जानकारी दी है।

10 दिन से खाना-पीना कर दिया बंद

बाघिन बिजली की उम्र 8 साल की थी। उसके यूट्रस-ओरल में इन्फेक्शन था। जंगल सफारी में पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थी। बिजली ने पिछले 10 दिन से खाना-पीना बंद कर दिया था।

इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया था।

ये फोटो मौत से 9 दिन पहले की है, जब बाघिन को वनतारा भेजा जा रहा था।

ये फोटो मौत से 9 दिन पहले की है, जब बाघिन को वनतारा भेजा जा रहा था।

सीजेडए से अनुमति मिलने में लग गए 10 दिन, इससे इलाज में देरी हुई

सीटी स्कैन में यूट्रस में इंफेक्शन की बात सामने आई तो इलाज के लिए वन विभाग ने वनतारा शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। अनुमति के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र लिखा गया लेकिन अनुमति मिलने में 10 दिन लग गए। अनुमति मिलने पर बिजली को वनतारा जामनगर भेजा गया।

शुरुआत में उसकी बीमारी को गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र) के रूप में डाइग्नोज कर इलाज शुरू किया गया। बाद में हेमेटोलॉजिकल जांच और अल्ट्रासाउंड जांच में किडनी में इंफेक्शन के लक्षण मिले। इसके बाद वनतारा की एक विशेषज्ञ पशु चिकित्सा टीम को उन्नत जांच और इलाज के लिए बुलाया गया।

डॉक्टर बोले- पहले से कमजोर और बीमार थी

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के रिक्वेस्ट पर 5 अक्टूबर को वनतारा की टीम रायपुर पहुंची थी। वनतारा की टीम में बताया कि वह कमजोर और बीमार लग रही थी। बिजली के डाइजेशन में भी समस्या थी।

अल्ट्रासाउंड और डायग्नोस्टिक टेस्ट के बाद यह सामने आया था कि उसकी किडनी सही तरीके से फंक्शन नहीं कर रही। इसके अलावा इसके अलावा गर्भाशय में भी संक्रमण मिला था। CZA से 6 अक्टूबर को अनुमति मिलने के बाद वनतारा के एडवांस सर्जिकल केयर में उसे शिफ्ट किया गया था।

‘इलाज के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों’

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए था कि मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के ज्यादा नजदीक है और बाघ प्रदेश के नाम से भी इसे जाना जाता है।

ऐसे में बिजली के इलाज के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों किया गया। जो मेडिकल कंडीशन उसके साथ थी उसे लिहाज से यह नहीं लगता कि रायपुर से जामनगर तक की दूरी तक उसे ट्रैवल करना चाहिए था।

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बाघिन को हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया था।

बाघिन को हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से रवाना किया गया था।

रायपुर के जंगल सफारी की बाघिन ‘बिजली’ को इलाज के लिए गुजरात के वनतारा शिफ्ट किया गया है। बाघिन बिजली को यूट्रस और ओरल में इन्फेक्शन है। उसे खाने-पीने में परेशानी हो रही है। बाघिन को हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से शाम को रवाना किया गया। पढ़ें पूरी खबर…



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