Liquor scam… Niranjan Das got Rs 16 crore | शराब घोटाला…निरंजन दास को हर माह 50 लाख मिले: पूर्व आबकारी आयुक्त ने 16 करोड़ कमाए, सरकार को 530 करोड़ का घाटा कराया – Chhattisgarh News

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November 27, 2025


छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में करीब 7 हजार पेज की 7वीं चार्जशीट पेश की। चार्जशीट में पूर्व एक्साइज कमिश्नर निरंजन दास समेत 6 आरोपियों के नाम हैं। सभी आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

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EOW के मुताबिक, अब तक इस मामले में कुल 50 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। जांच में पता चला कि निरंजन दास ने 16 करोड़ कमाए। भ्रष्टाचार के कारण सरकार को 530 करोड़ का नुकसान हुआ। नितेश पुरोहित और उसका बेटा यश पुरोहित अपने होटल में सिंडिकेट का पैसा जुटाते थे।

जांच से पता चला कि निरंजन दास ने तीन साल के कार्यकाल के दौरान एक्साइज पॉलिसी में कई बदलाव किए। टेंडर में हेरफेर किया और सिस्टम में हेरफेर किया, जिससे शराब घोटाला सिंडिकेट को फायदा हुआ। सिंडिकेट को अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर का संरक्षण प्राप्त था।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में लगभग सात हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में लगभग सात हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की

पूर्व आबकारी आयुक्त को हर महीने मिलते थे 50 लाख रुपए

EOW की चार्जशीट के मुताबिक निरंजन दास को एक्साइज पॉलिसी में बदलाव करने के लिए हर महीने 50 लाख रुपए मिलते थे। इस तरह से निरंजन ने करीब 16 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। इस रकम से निरंजन दास ने अपने परिजनों के लिए संपत्ति खरीदी, जिसकी जांच जारी है।

चार्जशीट के मुताबिक शराब कंपनियों से जबरन कमीशन लेने के लिए गलत FL-10A लाइसेंस प्रणाली बनाई गई। इसके तहत ओम साई बेवरेजेस कंपनी के संचालक अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा पर भी आरोप साबित हुए हैं।

अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा कंपनियों और सिंडिकेट के बीच बिचौलिये के रूप में काम करते थे। गलत लाइसेंस नीति (FL-10A) के कारण सरकार को लगभग 530 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसमें से 114 करोड़ रुपए का फायदा इनकी कंपनी को मिला।

ये छह आरोपियों की तस्वीरें हैं। EOW ने अपनी चार्जशीट में उनकी भूमिका के बारे में बताया है।

ये छह आरोपियों की तस्वीरें हैं। EOW ने अपनी चार्जशीट में उनकी भूमिका के बारे में बताया है।

नितेश और यश घोटाले के पैसे होटल में छिपाते थे

EOW की चार्जशीट के मुताबिक नितेश पुरोहित और उनके बेटे यश पुरोहित घोटाले की बड़ी रकम अपने होटल में इकट्ठा करते थे। उसे छुपाने के साथ आगे भेजने का काम करते थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि उनके माध्यम से 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध रकम का लेन-देन हुआ।

अनवर ढेबर के करीबी दीपेन चावड़ा पर भी कई आरोप हैं। उसने सिंडिकेट के लिए बड़ी रकम संभाली। उसे हाई-प्रोफाइल लोगों तक पहुंचाया। हवाला लेन-देन में भी शामिल था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की 2020 की रेड के बाद 1,000 करोड़ से ज्यादा कैश और सोना जमा किया। उसे अलग-अलग जगहों पर छिपाया।

अब जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी।

खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई। खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली।

सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।

शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए

शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी।

इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी। डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था।

ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।

एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।

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