17 tribal families refused to take SIR forms | 17 आदिवासी परिवार SIR फॉर्म लेने से किया इनकार: सरकारी योजनाओं से भी दूरी, कांकेर में कई चुनावों से नहीं कर रहे मतदान – Kanker News

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November 30, 2025


कांकेर जिले के ग्राम पंचायत लेंडारा में 17 आदिवासी परिवार विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत फॉर्म लेने से इनकार कर रहे हैं। ये परिवार किसी भी सरकारी योजना से जुड़ने को भी तैयार नहीं हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन चिंतित है।

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जानकारी के अनुसार, ये परिवार पिछले दो-तीन चुनावों से मतदान भी नहीं कर रहे हैं। पहले इनके नाम से राशन आता था, लेकिन उनके राशन न उठाने के कारण अब उनके कोटे का राशन भी आना बंद हो गया है।

इसके अलावा दो परिवारों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने से भी उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया है। ग्रामीण स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और बीएलओ सहित सभी अधिकारियों ने इन परिवारों को समझाने के कई प्रयास किए हैं।

हालांकि, ये परिवार बातचीत करने को भी तैयार नहीं हैं। बीएलओ टीम को भी कई बार उनसे सीधे बात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

गांव के राशन दुकान संचालक रामकुमार यादव ने बताया कि पहले चार परिवारों ने राशन लेने से मना कर दिया था, लेकिन इस महीने से अन्य परिवारों ने भी राशन नहीं लेने की बात कही है।

ग्राम पंचायत के सचिव संतोष कुमार निषाद ने बताया कि शासकीय योजनाओं का विरोध करने की जानकारी मिलने के बाद गांव में बैठक आयोजित की गई। लेकिन ग्रामीण किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर देते हैं। अब स्थिति यह है कि वे आवास निर्माण कराने से भी इनकार कर रहे हैं।

पटवारी तुषार ठाकुर ने बताया कि ग्रामीणों को नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी कई बार दी गई है, लेकिन वे कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं। तहसीलदार सरोना एसके साहू ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी कल ही मिली है। ग्रामीण एसआईआर क्यों नहीं कराना चाहते, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

एसडीएम कांकेर अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि लेंडारा गांव के कुछ परिवार एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन अब काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें समझाने की तैयारी में है।

किस वजह से बदला नजरिया ?

ग्रामीण का कहना है कि पहले ये परिवार गांव की हर गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल होते थे। पंचायत बैठकों, सामाजिक आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता रहती थी। मतदान में भी वे हिस्सा लेते थे। लेकिन कुछ समय पहले ‘भारत सरकार कुटुंब परिवार’ नामक संस्था से जुड़ने के बाद उनकी सोच कथित रूप से बदल गई।

इसके बाद उन्होंने मतदान बंद कर दिया, चार परिवारों ने सरकारी राशन लेना छोड़ दिया और शासन की योजनाओं से दूरी बना ली। अब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भी इन परिवारों ने बीएलओ से फॉर्म तक नहीं लिया, जिससे पूरा प्रशासन परेशान है।



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