मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में साइबर सेल मनेंद्रगढ़ ने बैंक प्रबंधकों और अधिकारियों के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम, पुलिस और बैंकों के बीच त्वरित समन्वय स्थापित करना तथा तकनीकी कार्रवाई को
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बैठक में म्यूल अकाउंट की त्वरित पहचान, ‘पुट ऑन होल्ड’ प्रक्रिया और संदिग्ध खातों की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया। साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को समय रहते फ्रीज़ करने और पीड़ितों की राशि की रिकवरी में तेजी लाने के लिए संयुक्त कार्य योजना बनाने पर भी चर्चा हुई।

बैंक स्टाफ को साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने के निर्देश
बैंक स्टाफ को फिशिंग, यूपीआई फ्रॉड, ऑनलाइन टास्क/इन्वेस्टमेंट स्कैम और व्हाट्सऐप हैकिंग जैसे बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। साथ ही, ग्राहकों को जागरूक करने को कहा गया कि वे किसी प्रलोभन या लापरवाही के कारण अपना खाता किसी अन्य को उपयोग न करने दें।
बैंकों में फर्जी केवाईसी और संदिग्ध खातों पर कड़ी नजर
फर्जी केवाईसी, नकली दस्तावेजों और संदिग्ध खातों को रोकने के लिए बैंकों में मौके पर सत्यापन प्रक्रिया लागू करने पर बल दिया गया। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, इंटर-बैंक सहयोग, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, ट्रांज़ेक्शन ट्रैकिंग और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विवेक पाटले, पुष्कल सिन्हा, भूपेंद्र यादव, जितेंद्र ठाकुर और राकेश तिवारी उपस्थित रहे। विभिन्न बैंकों से उदय सिंह (एसबीआई), संतोष सोनी (बैंक ऑफ बड़ौदा), उदित कश्यप (डीसीसीबी), प्रवीण वर्मन (इंडसइंड), मनीष झारिया (एक्सिस बैंक), योगेंद्र सिंह (यूबीआई), साकेत सौरभ (बैंक ऑफ इंडिया), प्राग सुहाने (एचडीएफसी), अमित गुप्ता व राहुल जायसवाल (डीएफसी फर्स्ट) और धनेश्वर बावले (पीएनबी) के प्रबंधक व कर्मचारी भी मौजूद थे। सभी अधिकारियों ने साइबर अपराधों की रोकथाम में पुलिस विभाग को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।