CG Weather: उत्तरी छत्तीसगढ़ में शनिवार सुबह घने कोहरे व कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित रहा। ग्रामीण इलाकों में कोहरे के कारण दृश्यता शून्य हो गई थी …और पढ़ें

HighLights
- घने कोहरे से ढंका सरगुजा, विजिबिलिटी शून्य से 20 मीटर पहुंची
- कड़ाके की ठंड के बीच तापमान पांच डिग्री के करीब पहुंचा
- पश्चिमी विक्षोभ से उत्तरी छत्तीसगढ़ में छा रहा घना कोहरा
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। उत्तरी छत्तीसगढ़ में शनिवार सुबह घने कोहरे व कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित रहा। ग्रामीण इलाकों में कोहरे के कारण दृश्यता शून्य हो गई थी। शहर में भी 10 से 15 मीटर के आगे की चीज नजर नहीं आने से आवागमन पर इसका असर पड़ा। सड़कों में आवाजाही भी काफी कम रही। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को कोहरे व कड़ाके की ठंड में परेशानी उठानी पड़ी। दोपहर 12 बजे के आसपास कोहरा छंटने से धूप महसूस हुई।
शनिवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री तक पहुंच गया। हाड़ कंपा देने वाली हवा चलने से लोगों को दिन में भी राहत नहीं मिली। वहीं न्यूनतम तापमान में आधा डिग्री गिरावट हुई और यह 5.2 डिग्री दर्ज किया गया। जगह-जगह लोग ठंड से बचने अलावा तापते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के साथ उत्तर पश्चिमोत्तर दिशा से आ रही हवा के कारण कोहरा छा रहा है। अगले कुछ दिनों तक कोहरे का असर बना रहेगा।
वहीं चौबीस घंटे तक ठंड के तेवर तीखे बने रहने की संभावना है। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से जनवरी के पहले पखवाड़े को अत्यधिक ठंड की अवधि मानी जाती है। कुछ इसी तरह का मौसम उत्तरी छत्तीसगढ़ में बना हुआ है। न्यूनतम तापमान लगातार 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। बीच बीच में विक्षोभ के प्रभाव से ठंड और बढ़ रही है।
नया विक्षोभ देगा कुछ राहत, फिर लौटेगी कड़ाके की ठंड
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट ने बताया कि वर्तमान में विक्षोभ के साथ पश्चिमोत्तर दिशा से आ रही हवा के कारण तेज ठंड व कोहरा छा रहा है। शनिवार को इस सीजन का सबसे घना कोहरा छाया रहा। अगले चौबीस घंटे बाद नए विक्षोभ की सक्रियता से गर्म हवा का प्रवाह होगा जिससे न्यूनतम तापमान में एक-दो डिग्री वृद्धि की संभावना है। जैसे ही विक्षोभ का प्रभाव कमजोर पड़ेगा, एक बार फिर कड़ाके की ठंड पड़ेगी। भट्ट के अनुसार लगातार विक्षोभ के कारण उत्तरी छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में कोहरे का प्रभाव बना रहेगा।
इन कारणों से बनता है कोहरा
मौसम विज्ञानी भट्ट के अनुसार ठंड के दिनों में जब वायुमण्डल शुष्क रहता है तब वायुमण्डल के तापमान में कमी की यह प्रक्रिया वायुमण्डल को और भी अधिक शीतल कर देती है, लिहाजा न्यूनतम तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होती है। जब सुबह के समय धरती की सतह अपने न्यूनतम तापीय स्थिति में रहती है तब यदि इसकी सतह से किसी बाहरी विक्षोभ या मौसमी घटक की ठंडी हवा गुजरती है तो हवा में उपस्थित जलवाष्प कणों के संघनन की दर बढ़ जाती है।
ये जलवाष्प के संघनित कण द्रव रूप में या अधिक शीतल होने पर ठोस रूप में हवा में तैरने लगते हैं। हवा में तैरते इन संघनित कणों को उनके घनत्व के आधार पर कुहासा, कोहरा बादल के रूप में परिभाषित किया जाता है। इन दिनों हमारे आसपास बनने वाला कोहरा ठंडी धरती की सतह पर से गुजरने वाली ठंडी हवा के संघनन के कारण है।
दो दिनों में ऐसा रहा तापमान
दिनांक अधिकतम न्यूनतम
19 दिसंबर 21.9 5.8
20 दिसंबर 22.1 5.2