गर्भवती पत्नी के चरित्र पर करता था शक, गला दबाकर कर दी हत्या, अब कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा

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November 29, 2025


Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कोर्ट ने चरित्र शंका पर गर्भवती पत्नी की हत्या करने के आरोपी पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। आठ माह के गर्भस्थ शिशु का जन्म रोकने के लिए आरोपी ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी थी।

Publish Date: Sat, 29 Nov 2025 08:07:37 PM (IST)

Updated Date: Sat, 29 Nov 2025 08:07:37 PM (IST)

गर्भवती पत्नी के चरित्र पर करता था शक, गला दबाकर कर दी हत्या, अब कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा
गर्भवती पत्नी का मर्डर करने वाले को कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. कोर्ट ने पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है
  2. पति ने गर्भस्थ शिशु का जन्म रोकने के लिए कर दी थी पत्नी की हत्या
  3. मृतका अनिला सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिली थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश जनक कुमार हिड़को की अदालत ने चरित्र शंका पर गर्भवती पत्नी की हत्या करने के आरोपित पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। आठ माह के गर्भस्थ शिशु का जन्म रोकने के लिए आरोपित ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी थी। साक्ष्य छिपाने के लिए आरोपित ने मृतका के मोबाइल को भी तोड़ दिया था। आरोपित को संदेह था कि गर्भ में पल रहा बच्चा उसका नहीं है।

अभियोजन के अनुसार दरिमा थाना के जयपुर गांव में 29 जनवरी 2025 की सुबह एक खेत में गांव की ही अनिला सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि पर पुलिस को पहला संदेह उसके पति ग्राम सकलपुर थाना भटगांव निवासी अनिल सिंह शांडिल्य (20) पर गया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की थी तो उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया था। घटना वाली रात आरोपित ने फोन कर अनिला को घर से बाहर बुलाया था। खेत में दोनों ने साथ बैठकर बात की।

मृतका साथ चलने की जिद कर रही थी जबकि पति उसके चरित्र और गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर संदेह जता रहा था। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ था और अनिल सिंह ने गला दबाकर पत्नी की हत्या कर मौके से भाग गया था। पुलिस जांच में पता चला था कि आरोपित भी पत्नी के घर पर ही रहता था, लेकिन पुलिस को गुमराह करने घटना के कुछ दिन पहले ही वह अपने गांव चला गया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया था।

कई धाराओं का दोषी पाया गया आरोपी

उसके विरुद्ध हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीकृत था। षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश जनक कुमार हिड़को की अदालत ने प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपित अनिल सिंह शांडिल्य को बीएनएस की धारा 103(1) , 91 तथा 238(क) का दोषी पाया।

अदालत ने तीनों ही धाराओं में आरोपित को क्रमशः आजीवन कारावास, पांच वर्ष तथा सात वर्ष कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर आरोपित को तीन-तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।



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