राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर में पोस्टमॉर्टम के दौरान एक अत्यंत दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 62 वर्षीय …और पढ़ें

HighLights
- अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का दुर्लभ मामला
- 25 जनवरी को महिला की हुई थी मौत
- समय पर जांच से बच सकती थी जान
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में पोस्टमॉर्टम के दौरान चिकित्सकों के सामने एक दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला आया है। 62 वर्षीय महिला महेश्वरी की मृत्यु के बाद जब शव परीक्षण किया गया, तो उसके पेट से पेट कुछ ऐसा निकला जिसे देख डॉक्टर भी हैरान रह गए।
दो दशकों से सूजन के साथ जी रही थी महिला
फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संतू बाग ने बताया कि मृतका पिछले करीब 20 वर्षों से पेट में लगातार सूजन के साथ जीवन व्यतीत कर रही थी। इसके बावजूद उसने कभी चिकित्सकीय जांच या उपचार नहीं कराया।
25 जनवरी को हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार 25 जनवरी को महिला को अचानक चक्कर आया, जिससे वह गिर पड़ी। इसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात जब पोस्टमॉर्टम किया गया, तब यह गंभीर चिकित्सकीय स्थिति सामने आई।
11 किलोग्राम वजन और 32 इंच परिधि
11 किलो की 20 साल पुरानी रसौली
62 वर्षीय महिला महेश्वरी की मृत्यु के बाद जब पोस्टमॉर्टम किया गया, तो उसके पेट से लगभग 20 वर्ष पुरानी गर्भाशय रसौली (फाइब्राइड) निकाली गई। पोस्टमॉर्टम में सामने आई रसौली का वजन करीब 11 किलोग्राम तथा परिधि लगभग 32 इंच पाई गई। इतनी बड़ी और लंबे समय से शरीर में मौजूद रसौली को देखकर वरिष्ठ चिकित्सक भी हैरान रह गए।
समय पर इलाज से बच सकती थी जान
पोस्टमॉर्टम दल में शामिल डॉ. संतू बाग और पैथोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि इतने लंबे समय तक शरीर में इतनी बड़ी गर्भाशय रसौली का रहना अत्यंत दुर्लभ है। यदि समय रहते जांच और उचित उपचार कराया गया होता, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
चिकित्सकों की चेतावनी
चिकित्सकों ने बताया कि पेट में लगातार सूजन, दर्द या किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। स्वास्थ्य समस्याओं को छुपाना या टालना गंभीर परिणाम दे सकता है। समय पर जांच और उपचार ही जीवन रक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।