नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत माजा का आश्रित ग्राम राजाकटेल पंडो बहुल था। विशेष संरक्षित जनजाति पंडो की जमीन पर झारखंड और बिहार से आए मुस्लिमों ने कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे मुसलमानों की संख्या बढ़ती चली गई। यहां की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) पूरी तरह से बदल गई।
कब्जे का विरोध करने पर पंडो समाज के लोगों को मारने-पीटने की धमकी दी जाने लगी। पंडो समाज के लोगों ने हिम्मत कर राजस्व विभाग के अधिकारियों से शिकायत की तब प्रकरण सामने आया।
सरगुजा कलेक्टर को जांच का आदेश
नगर निगम अंबिकापुर के भाजपा पार्षद आलोक दुबे के अलावा भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारी गांव पहुंचे। संपूर्ण वस्तुस्थिति की जानकारी ली। भाजपा पार्षद की शिकायत पर कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा ने सरगुजा कलेक्टर को जांच का आदेश दिया।
मुसलमानों को बताना होगा जमीन कैसे मिली
इधर, शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच व कार्रवाई के आदेश के बाद एसडीएम उदयपुर के न्यायलय ने धारा 170 बी के तहत प्रकरण दर्ज कर कब्जाधारी मुसलमानों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी।
मुसलमानों को यह बताना होगा कि जमीन उन्हें कैसे मिली। मुस्लिमों द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार लखनपुर द्वारा भू राजस्व संहिता की धारा 250 के तहत भी नोटिस जारी किया गया है।
बकरा-बकरी,चूड़ी-मनिहारी के धंधे के नाम पर जमीन हथियाने का खेल
पंडो बहुल बस्ती में वर्ष 1987 में पहली बार दो-तीन मुसलमान परिवार आए। इन्होंने बकरा-बकरी तथा चूड़ी मनिहारी का धंधा करने के नाम पर जमीन मांगी। भोले-भाले पंडो समाज के लोगों ने उन्हें रहने के लिए जमीन दी। आरोप है कि इसी भोलेपन का फायदा उठाकर कब्जे का खेल बढ़ा।
शराब सेवन कराकर तथा कुछ रुपये देकर कागजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। 2012 के बाद झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से नाते-रिश्तेदारों और परिचितों को बुलाकर मुसलमानों ने बसा दिया। आज इनकी संख्या बढ़ गई है।
खुलकर विरोध में सामने आया पंडो समाज
लगभग 80 से 90 मुस्लिम परिवार के लोग घर बनाकर यहां सामाजिक,राजनैतिक और आर्थिक रूप से पंडो समाज के लोगों से मजबूत स्थिति में खड़े हो गए हैं। पंचायत के कार्यों में उन्हीं का दखल है। पंडो समाज के लोग वर्षों तक अपनी जमीन मांगने से भी डरते थे, लेकिन अब परिस्थिति बदली है। वे खुलकर विरोध में सामने आ गए हैं।
राजस्व कर्मियों की भूमिका संदिग्ध
मुसलमानों ने सुनियोजित साजिश के तहत पंडो समाज के लोगों की कब्जे की जमीन का राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत कर पट्टा बनवा लिया। पंडो लोगों के सेटलमेंट और शासकीय पट्टे की जमीन का अंतरण नहीं हुआ है लेकिन जमीन के बड़े हिस्से पर कब्जा मुसलमानों का है।
राजाकटेल तथा आसपास के बसाहट में निवासरत 70 से 80 पंडो परिवारों की जमीन पर मुसलमानों के कब्जे की शिकायत पर एसडीएम न्यायालय उदयपुर में धारा 170 बी का प्रकरण पंजीकृत कर नोटिस जारी करना शुरू कर दिया गया है। पंडो समाज के लोगों ने एसआइआर के दौरान भी बाहर से आए मुसलमानों के नाम पर आपत्ति दर्ज की थी।
क्या है धारा 170 बी
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170 बी, आदिवासी भूमि हस्तांतरण से संबंधित सुरक्षात्मक धारा है। यह धारा, आदिवासी वर्ग से गैर आदिवासी वर्ग को नियम विरुद्ध की गई कृषि भूमि की बिक्री, हस्तांतरण, या अन्य प्रकार के हस्तांतरण की जांच कर, भूमि को मूल आदिवासी भू-स्वामी को वापस दिलाने का अधिकार राजस्व अधिकारियों को देती है।
यह भी पढ़ें- ‘पुलिस नहीं सुनती’ लिखकर मजदूर ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में सरपंच पर लगाए गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
धारा 250 में भी जमीन वापसी का प्रविधान
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 250 अवैध रूप से बेदखल किए गए भूमिस्वामी को जमीन का कब्जा वापस पाने के लिए तहसीलदार को आवेदन करने का अधिकार देती है। यह एक त्वरित कार्रवाई है, जिसमें बेदखली या अनधिकृत कब्जे की तारीख से कुछ वर्षों के भीतर आवेदन करना होता है और यह आदिवासी भूमि के संरक्षण हेतु विशेष सुरक्षा भी प्रदान करती है।
पंडो जनजाति की जमीन पर कब्जे को लेकर एसडीएम न्यायालय उदयपुर में धारा 170 बी के तहत प्रकरण संस्थित किया गया है। कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किया गया है। तहसील कार्यालय लखनपुर की ओर से भू राजस्व संहिता की धारा 250 के तहत भी नोटिस जारी किया गया है।
-अंकिता पटेल तहसीलदार , लखनपुर