शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जमानत दी जाती है तो सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है। मा
Publish Date: Fri, 12 Sep 2025 04:16:50 PM (IST)
Updated Date: Fri, 12 Sep 2025 04:19:00 PM (IST)

HighLights
- मंत्री लखमा की जमानत याचिका खारिज
- आरोप आर्थिक अपराध से जुड़े, जांच जारी
- सबूतों से छेड़छाड़ करने का खतरा- हाई कोर्ट
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि उन पर लगे आरोप गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़े हैं और जांच अभी जारी है। यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है।
ईडी ने जनवरी में किया था गिरफ्तार
लखमा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। ईडी का आरोप है कि 2019 से 2023 तक उन्होंने एफएल-10ए लाइसेंस नीति लागू की, जिससे अवैध शराब व्यापार को बढ़ावा मिला। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब सिंडिकेट से उन्हें हर महीने करीब दो करोड़ रुपए मिलते थे और इस तरह कुल 72 करोड़ की अवैध कमाई हुई।
लखमा ने ये दी दलील
लखमा ने कोर्ट में कहा कि मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। आरोप सह-अभियुक्तों के बयानों पर आधारित हैं, कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो गई है। सह अभियुक्तों अरुणपति त्रिपाठी, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनिल टुटेजा और अरविंद सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए।
ईडी ने किया था विरोध
ईडी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि लखमा की इस मामले में प्रमुख भूमिका रही है। उनकी रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है। हाई कोर्ट ने एजेंसी की दलील से सहमति जताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।