तलाक के बाद रिश्तों में आई नरमी और आपसी समझदारी के चलते पति-पत्नी ने एक बार फिर साथ रहने का निर्णय लिया और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए आपसी रजामंदी के …और पढ़ें

HighLights
- तलाक के बाद साथ मनाई सालगिरह
- फिर डिक्री रद कराने पहुंचे हाई कोर्ट
- बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट में अपनी तरह का एक अलग ही मामला सामने आया। आमतौर पर फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पति या फिर पत्नी याचिका दायर करती हैं, जिसमें फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की डिक्री देने से मना कर दिया जाता है। यहां मामला एकदम अलग और अलहदा है। फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक की डिक्री को रद करने की मांग को लेकर पति-पत्नी हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने याचिका को रद करते हुए कहा कि कानूनी तौर पर अब यह संभव नहीं है। आपसी सहमति के आधार पर तलाक की मंजूरी देते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पारित डिक्री को खारिज नहीं किया जा सकता।
शादी की सालगिरह भी साथ मनाई
तलाक के बाद रिश्तों में आई नरमी और आपसी समझदारी के चलते पति-पत्नी ने एक बार फिर साथ रहने का निर्णय लिया और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए आपसी रजामंदी के बाद पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। दायर याचिका में बताया कि हम दोनों के रिश्ते अब सामान्य हो गए हैं। हमने अपनी शादी की सालगिरह भी साथ-साथ मनाई है। साथ घूमने-फिरने गए और होटल भी बुक कराया। रिश्तों में आई नरमी और साथ रहने का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक की डिक्री को रद करने की मांग की।
विवाद से सुलह तक का सफर
गौरतलब है कि बिलासपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाली महिला की शादी मोपका निवासी युवक से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच रिश्ते में कड़वाहट आई और साथ-साथ रहने के बजाय अलग रहने का निर्णय लिया। इसके बाद परिवार न्यायालय में तलाक के लिए अर्जी लगाई। आपसी सहमति के आधार पर परिवार न्यायालय ने तलाक की डिक्री पारित कर दी।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
याचिका की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच में हुई। बेंच ने कहा कि तलाक पति-पत्नी की आपसी सहमति से हुआ है। लिहाजा अब अपील की कोई गुंजाइश नहीं है। बेंच ने यह भी कहा, कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों और प्रक्रियाओं से चलता है। बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।