बहू से दुष्कर्म करने वाले ससुर को दस साल की सजा, कोर्ट ने फैसले में दिया रामचरित मानस के दोहे का उदाहरण

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August 31, 2025


CG News: बहु से दुष्कर्म करने के आरोपी ससुर को दोष सिद्व होने पर जिला कोर्ट ने दस साल सश्रम कारावास की कठोर सजा सुनाई हैं। मामले में दिए गए अपने फैसले में कोर्ट ने तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरित मानस के श्लोक का उदाहरण भी दिया है।

Publish Date: Sun, 31 Aug 2025 10:20:35 PM (IST)

Updated Date: Sun, 31 Aug 2025 10:20:35 PM (IST)

बहू से दुष्कर्म करने वाले ससुर को दस साल की सजा, कोर्ट ने फैसले में दिया रामचरित मानस के दोहे का उदाहरण
बहू से दुष्कर्म करने वाले ससुर को दस साल की सजा ( सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. बहू से दुष्कर्म करने वाले ससुर को दस साल की सजा
  2. पीड़िता ने स्वयं को बचाने के लिए शोर मचाया
  3. पंडरापाठ चौकी क्षेत्र में हुई थी शर्मनाक घटना

नईदुनिया प्रतिनिधि, जशपुरनगर। बहु से दुष्कर्म करने के आरोपित ससुर को दोष सिद्व होने पर जिला न्यायालय ने दस साल सश्रम कारावास की कठोर सजा सुनाई हैं। मामले में दिए गए अपने फैसले में न्यायालय ने तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरित मानस के श्लोक का उदाहरण भी दिया है। विशेष लोक अभियोजक अनुपम तिर्की ने बताया कि 13 अगस्त 2022 को पीड़िता ने पंडरापाठ में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि 12 अगस्त को वह और उसकी बेटी घर में अकेले थे।

पति काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। धान रोपाई के दौरान चोटिल हो जाने से वह अपने कमरे में आराम कर रही थी। अचानक उसके कमरे में आरोपित जो रिश्ते में उसका चाचा ससुर लगता है घुस आया और उससे दुष्कर्म करने लगा। पीड़िता ने स्वयं को बचाने के लिए शोर मचाया और उसकी बेटी भी घबरा कर शोर मचाते हुए सहायता के लिए बाहर दौड़ गई। कुछ देर में बेटी पड़ोसियों को लेकर वापस लौटी, तब पड़ोसियों ने उसे आरोपित के चुंगल से छुड़ाया था।

पीड़िता की शिकायत पर बगीचा थाना में आरोपित के विरूद्व भारतीय दंड विधान की धारा 376,450 के अंर्तगत अपराध पंजिबद्व कर गिरफ्तार किया गया था। मामले में जांच पूरी कर बगीचा पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलील और प्रस्तुत किये गए प्रमाणों के आधार पर अपर सेशन न्यायाधीश जनार्दन खरे की अदालत आरोपित को दोषी पाते हुए दस साल सश्रम कारावास और 2 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा ना करने पर आरोपित को एक साल साधारण कारावास की सजा अतिरिक्त भुगतनी पड़ेगी।

न्यायालय ने दिया रामचरित मानस के श्लोक का उदाहरण

आरोपित चाचा ससुर को सुनाई गए दस साल कठोर कारावास की सजा में न्यायाधीश जनार्दन खरे ने गोस्वामी तुलसीदार द्वारा रचित रामचरित मानस के दोहे का उदाहरण स्वरूप उल्लेख करते हुए उसका भावार्थ भी बताया है। अपने निर्णय में न्यायाधीश ने लिखा है, ‘अनुज बधु भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।।



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