रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे 130 पर गुरुवार को अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने 22 मवेशियों को कुचल दिया। जिसमें से 18 की मौत हो गई, वहीं बाकियों की स्थिति गंभीर है। घटना से आक्रोशित गो सेवकों ने शवोंं को हाईवे पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस की समझाइश के बाद चक्काजाम खत्म किया गया।
By Roman Tiwari
Publish Date: Fri, 01 Aug 2025 02:32:26 PM (IST)
Updated Date: Fri, 01 Aug 2025 02:37:55 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: मुंगेली जिले के ग्राम किरना के पास गुरुवार तड़के रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे 130 पर एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क किनारे बैठे 22 गोवंशों को रौंद दिया। दर्दनाक हादसे में 18 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना से आक्रोशित गोसेवकों व विभिन्न संगठनों के लोगों ने मौके पर चक्काजाम कर दिया। इस बीच वाहनों की कतार दोनों ओर से लगने लगी। इसकी सूचना से हड़कंप मच गया। मौके पर सरगांव पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने समझाइश दी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर एक घंटे बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद भी नहीं हो रहा अमल
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पिछले मामलों में भी जिला प्रशासन को सड़क किनारे घूमते मवेशियों की सुरक्षा को लेकर निर्देशित किया है। 15 जुलाई को रतनपुर के चपोरा में हुए हादसे के बाद हाई कोर्ट 16 जुलाई को संज्ञान लेते हुए निर्देश दिए थे। बावजूद इसके 27 जुलाई को दो अलग-अलग मामले में 24 गौवंशियों की जान लगी गई थी। हाई कोर्ट ने मामले में स्पष्ट किया है कि सड़कों पर गोवंश की मौत प्रशासन की नाकामी का प्रतीक है। बावजूद इसके एक के बाद एक दुर्घटनाएं लापरवाही को उजागर करती हैं।
15 जुलाई की भयावह दुर्घटना
रतनपुर के चपोरा गांव में 15 जुलाई को एनएच 130 पर सड़क पर बैठे मवेशियों को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन में चपेट में लिया था। दुर्घटना में 18 मवेशियों की मौत हो गई थी। 27 जुलाई को दो जगह दुर्घटना, फिर वही मौत का मंजर :चकरभाठा क्षेत्र के कडार-सरधा मार्ग पर अज्ञात वाहन ने 24 गायों को चपेट में लिया था। दुर्घटना में 17 मवेशियों की मौत हो गई थी। इसके अलावा मस्तूरी के लावर मोड़ पर छह मवेशियों की जान चली गई थी।
हाई कोर्ट नाराज, कहा- साइन बोर्ड और काऊ कैचर केवल दिखावे के लिए नहीं
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हाईवे और सड़कों पर मवेशियों की लगातार हो रही मौतों और दुर्घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और नगर निगम सहित संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईवे पर काऊ कैचर खाली खड़े हैं, जो केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं। अब इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
न्यायालय ने कलेक्टर और निगम आयुक्त को निर्देशित किया कि काऊ कैचर खाली न रहें और उनके प्रभावी उपयोग की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही, नेशनल हाईवे अथारिटी को सड़कों पर साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ में गुरुवार को मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दामाखेड़ा में नौ गायों की मौत और बारीडीह गांव के पास 14-17 गायों की सड़क हादसे में मौत की घटनाओं पर कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
कोर्ट ने पूछा कि 28 अप्रैल 2025 को दिए गए निर्देशों के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2025 को निर्धारित की है और तब तक सभी संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत कर अपना जवाब दाखिल करेंगे।