‘डीपीसी को अधिकारी-कर्मचारी के काम की योग्यता और एसीआर जांचने का पूरा अधिकार’, बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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January 30, 2026


Bilaspur High Court: बिलासपुर हाई कोर्ट ने अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि डीपीसी को संबंधित …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 30 Jan 2026 08:42:10 PM (IST)Updated Date: Fri, 30 Jan 2026 08:42:10 PM (IST)

'डीपीसी को अधिकारी-कर्मचारी के काम की योग्यता और एसीआर जांचने का पूरा अधिकार', बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है
  2. डीपीसी को अधिकारी-कर्मचारी के काम की योग्यता और एसीआर जांचने का पूरा अधिकार
  3. पदोन्नति के लिए संबंधित कर्मचारी का पांच साल का रिकॉर्ड होना जरूरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि डीपीसी को संबंधित कर्मियों के काम की योग्यता और एसीआर में लिखी बातों की जांच करने का पूरा अधिकार है। एसीआर ग्रेडिंग के आधार पर डीपीसी न्यूनतम मापदंड तय कर सकती है। डीपीसी ने प्रमोशन के लिए संबंधित कर्मचारी के कामकाज का पांच साल का रिकार्ड बेहतर होने की शर्त रख दी है। डिवीजन बेंच ने डीपीसी के इस निर्णय को सही ठहराया है।

पदोन्नति को लेकर दायर याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने कहा वरिष्ठता के साथ ही कर्मचारियों के काम की योग्यता और एसीआर में लिखी बातों और दी गई ग्रेडिंग के आधार पर न्यूनतम बेंचमार्क तय करने का अधिकारी डीपीसी को है। पदोन्नति से वंचित कर जूनियर को प्रमोशन देने विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए उद्यानिकी विभाग में पदस्थ स्कम सिंह तोमर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि उसके खिलाफ न तो कोई विभागीय जांच हो रही है और न ही गंभीर शिकायत है। इसके बाद भी उसकी वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए जूनियर को पदोन्नति दे दी गई है। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के ला अफसरों ने कहा डीपीसी के दौरान कमेटी ने बीते पांच साल के कर्मचारियों के काम के रिकार्ड और एसीआर में दी गई ग्रेडिंग के आधार पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम मानक तय किया गया है।

डीपीसी के मापदंड पर खरा नहीं उतर पाया याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता डीपीसी के मापदंड पर खरा नहीं उतर पाया है। याचिकाकर्ता से जूनियर कर्मचारी की एसीआर में अच्छी ग्रेडिंग और काम के मापदंड बेहतर रहा है। लिहाजा उनको पदोन्नति की सिफारिश की गई है। इसके पूर्व इस याचिका पर सिंगल बेंच में सुनवाई हुई थी। दोनों फैसले में विरोधाभास की स्थिति बन गई थी। एक बेंच ने वरिष्ठता को सही ठहराया था। जबिक दूसरे बेंच ने पदोन्नति के लिए डीपीसी को मापदंड तय करने के अधिकार को सही ठहराया था। फैसलों में विरोधाभास की स्थिति को देखते हुए डिवीजन बेंच में मामला भेजा गया था।

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डिवीजन बेंच ने इसे सही ठहराया

डिवीजन बेंच ने पदोन्नति समिति के अधिकार का व्याख्या करते हुए इसे सही ठहराया है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि एसीआर की ग्रेडिंग और कर्मचारियों के कामकाज के आकलन करने का पूरा अधिकार डीपीसी को है। डीपीसी के उस मापदंड को भी डिवीजन बेंच ने सही ठहराया है जिसमें डीपीसी ने प्रमोशन के लिए बीते पांच साल के दौरान संबंधित कर्मचारी का कामकाज का रिकार्ड को बेहतर होने की शर्त तय कर दी है।



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