Bilaspur News: सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद छत्तीसगढ़, खासकर बिलासपुर में शिक्षक संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है। इसके लिए दो साल की समयसीमा तय की गई है।
Publish Date: Sun, 14 Dec 2025 01:22:14 PM (IST)
Updated Date: Sun, 14 Dec 2025 01:22:14 PM (IST)

HighLights
- बिलासपुर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बढ़ाई शिक्षकों की टेंशन
- कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया
- आदेश का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना बताया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद छत्तीसगढ़, खासकर बिलासपुर में शिक्षक संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है। इसके लिए दो साल की समयसीमा तय की गई है।
तय अवधि में टीईटी पास नहीं करने पर नौकरी से वंचित किया जा सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह नियम वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर लागू होगा। ऐसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति 2010 के बाद हुई है, उन्हें नियुक्ति के दो सालों के भीतर टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने साफ किया है कि संपूर्ण देश के सभी राज्यों को इस आदेश का पालन करना अनिवार्य है।
आदेश का उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के समान ही एक याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर में भी लंबित है। इसमें शिक्षकों ने टीईटी को पदोन्नति में अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
पदोन्नति को लेकर भी जारी है विवाद
याचिकाकर्ता शिक्षकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 में टीईटी को पदोन्नति के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रविधानों के विपरीत है। याचिका में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय शेष है, उन्हें टीईटी पास करने से छूट दी गई है, लेकिन यदि वे पदोन्नति चाहते हैं तो टीईटी अनिवार्य होगा। वहीं जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष या उससे अधिक का समय बचा है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी के बिना स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति पर भी लगाई रोक
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी के बिना स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि टीईटी योग्यता के बिना किसी भी स्पेशल शिक्षक की नियुक्ति नहीं की जाएगी, खासकर जहां भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की इन कार्यवाहियों के बाद राज्य सरकार का रुख क्या होगा, इस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।