‘मौत छींक जैसी आएगी’, बिलासपुर में लॉ स्टूडेंट ने खुद को लगाई आग, आयुष की चीखों से दहला हॉस्टल… मोबाइल में शूट किया वीडियो

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January 15, 2026


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: गुरुवार की सुबह करीब 11 बजे कोनी के रामायण नगर कालोनी में अचानक गूंजी एक चीख ने पूरे इलाके को दहला दिया। पटेल निवास की दूसरी मंजिल से आग की लपटों में घिरा आयुष यादव बाहर निकला और बचाओ…बचाओ…चिल्लाने लगा। हॉस्टल में मौजूद अन्य छात्र यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। शोर सुनते ही मकान मालिक और पड़ोसी दौड़ पड़े। सभी ने मिलकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन तब तक आयुष गंभीर रूप से झुलस चुका था।

आयुष को कोनी पुलिस की मदद से तत्काल सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डाक्टरों ने उसे अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल वह सेमी बर्न यूनिट में भर्ती है और उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इधर, घटना के बाद कोनी पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस आयुष के रूम पार्टनर, दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क कर रही है।

जिस हॉस्टल में आयुष रहता है, उसके मकान मालिक से भी जानकारी ली जा रही है। शाम करीब चार बजे पुलिस ने आयुष के कमरे को सील कर दिया। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि किन परिस्थितियों में आयुष ने ऐसा कदम उठाया। पुलिस ने उसके कमरे से मोबाइल फोन जब्त किया है। बताया जा रहा है कि घटना से पहले मोबाइल में वीडियो रिकार्डिंग चालू थी, हालांकि वीडियो में क्या कहा गया है और इसके पीछे की वजह क्या है। इस पर पुलिस ने फिलहाल कोई आधिकारिक बात नहीं कही है।

कमरे में बैठकर खुद पर डाला पेट्रोल

हास्टल के अन्य छात्रों ने नईदुनिया से कहा कि जब वह कमरे से निकला तो वहां उसका मोबाइल था। दोपहर एक बजे पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। पुलिस जब वीडियो देख रही थी तो उसमें आयुष कमरे में बैठकर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाते दिखा। आग लगने के बाद वह तुरंत दरवाजा खोलकर बाहर निकला। पुलिस ने कमरे की बारीकी से जांच की है और वीडियो सहित सभी साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है।

बिंदास छात्र था आयुष, सब स्तब्ध

हॉस्टल में 12 से अधिक छात्र रहते हैं, मकान मालिक से भी बहुत अच्छा व्यवहार रखता था। आसपास लोगों व अन्य छात्रों से पता चला कि वह एकदम बिंदास था। कभी तनाव में नजर ही नहीं आया। विधि का छात्र था, नियम-कानून अच्छे से जानता था। संभव है इसलिए उसने प्रत्यक्ष रूप से किसी पर कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगाया। मोबाइल जांच और स्वजन के बयान के बाद अगली कड़ी का पता चल सकेगा।

इंस्टा पर अमिताभ बच्चन का वीडियो

आयुष ने एक दिन पहले अपने इंस्टाग्राम आईडी पर अमिताभ बच्चन का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें अमिताभ कहते हैं कि देवियों और सज्जनों अब हम जा रहे हैं, कल से यह मंच नहीं सजेगा। अपनों से यह कह पाना कि कल से हम नहीं आएंगे न तो कहने की हिम्मत हो पाती है और न कहने का मन होता है। मैं अमिताभ बच्चन इस दौर से इस मंच को आखिरी बार कहने जा रहा हूं… शुभ रात्रि। एक संदेश भी है, छींक की तरह आएगी मौत, रूमाल जेब में ही रह जाएगा। कुछ दिनों पहले अपना डीपी भी बदला है उसमें अंग्रेजी में लिखा है सारी दिस पर्सन इज डेड। भावुक कर देने वाला यह संदेश अब सभी को दर्द दे रहा है।

पनीर-पूरी बनाया, साथी के साथ खाया

बीए एलएलबी प्रथम वर्ष के छात्र एवं रूम पार्टनर समर्थ राज पिता संतोष कुमार मोदी ने कहा कि आयुष के साथ हम 14 जनवरी की रात पनीर की सब्जी और पूरी बनाएं। दोनों ने मिलकर खाया। वह रात 12 बजे बिस्तर पर सोने चला गया। कहा कि सुबह जल्दी उठा देना। सुबह 10 बजे हम दोनों की परीक्षा थी। आयुष का बैंक एग्जाम था। विश्वविद्यालय पेपर देने जाने कहा तो उसने मना कर दिया। परीक्षा के बाद मुझे यह खबर मिली, जो मेरे लिए एकदम शाकिंग थी।

डटे रहे केंद्रीय विवि के अधिकारी

कोनी पुलिस ने आयुष के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित किया। इसके बाद तत्काल ला डिपार्टमेंट के प्रमुख डा.सुधांशु रंजन महापात्रा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.शैलेंद्र कुमार ने सिम्स पहुंचकर जानकारी ली। मीडिया सेल प्रभारी प्रो.मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था अपोलो लेकर गए। वहां छात्र की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। लगभग 90 फीसद जलने के कारण अभी हालत नाजुक है। आयुष के पिता प्रमोद यादव को सूचित कर दिया गया है वे रात तक पहुंच जाएंगे। कारणों का अभी कुछ भी पता नहीं चला है। कुलपति एवं कुलसचिव को लगातार अपडेट कर रहे हैं।

हाई लेवल डिप्रेशन के चलते कदम

आयुष का कदम बेहद झकझोर देने वाला है। गहरे अवसाद में व्यक्ति अक्सर ऐसे फैसले लेता है। डिप्रेशन दो तरह का होता है। एक सामान्य और दूसरा गंभीर। सामान्य अवसाद में समय रहते बातचीत, इलाज और सहारे से व्यक्ति को संभाला जा सकता है, ठीक वैसे जैसे धुंध में धीरे-धीरे रास्ता साफ होने लगता है। किंतु गंभीर अवसाद में व्यक्ति को जीवन पूरी तरह अंधकारमय नजर आता है और जीने की इच्छा खत्म हो जाती है। ऐसे में उसे समझाना कठिन हो जाता है। परिवार को सतर्क रहना चाहिए, समय पर विशेषज्ञ से परामर्श, दवाओं की निगरानी, खुला संवाद और भावनात्मक सहयोग ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय होता है।

– डा.आशुतोष तिवारी, मनोरोग चिकित्सक, बिलासपुर



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