Bilaspur News: सकरी थाना क्षेत्र के आसमा सिटी में रहने वाले सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त कर्मचारी से साइबर ठगों ने खुद को टेलीकाम का कर्मचारी और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर छह लाख 30 हजार रुपये की ठगी कर ली। जालसाजों ने उन्हें लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया और केस से नाम हटवाने की बात कहते हुए घटना को अंजाम दिया।
By sarfraj memon
Publish Date: Sun, 14 Dec 2025 03:39:15 PM (IST)
Updated Date: Sun, 14 Dec 2025 03:39:15 PM (IST)

HighLights
- आरपीएफ के रिटायर्ड कर्मचारी से छह लाख की ठगी
- साइबर ठगों ने दी लारेंस बिश्नोई केस में गिरफ्तारी की धमकी
- शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र के आसमा सिटी में रहने वाले सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त कर्मचारी से साइबर ठगों ने खुद को टेलीकाम का कर्मचारी और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर छह लाख 30 हजार रुपये की ठगी कर ली। जालसाजों ने उन्हें लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया और केस से नाम हटवाने की बात कहते हुए घटना को अंजाम दिया। रुपये मिलते ही जालसाजों ने अपने मोबाइल बंद कर दिए। इससे उन्हें ठगी की जानकारी हुई। शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।
टेलीकॉम कार्यालय का कर्मचारी बताकर ठगी
सकरी के आसमा सिटी में रहने वाले दिवाकर मंडल (61) आरपीएफ के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उनके मोबाइल पर दो नवंबर की सुबह आठ बजे अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम कार्यालय का कर्मचारी बताया। उसने रिटायर्ड कर्मचारी को बताया कि उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड का उपयोग कर मुंबई में कनाडा के बैंक में खाता खोला गया है। इससे अवैध गतिविधियों में लेनदेन की गई है।
मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है मामले की जांच
इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। इसके बाद कॉल को दूसरे व्यक्ति से कनेक्ट किया गया। दूसरे व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसने बताया कि कर्मचारी का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जुड़ा हुआ है और उन्हें लारेंस बिश्नोई से जुड़े केस में फंसाया गया है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से पीड़ित को उनका आधार कार्ड और पैन कार्ड दिखाया गया। खुद के दस्तावेज फोन करने वाले के पास देखकर उन्हें विश्वास हो गया।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर की ठगी
जालसाजों ने यह भी कहा कि पीड़ित के नाम से वारंट जारी हो चुका है और यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। ठग गिरोह के लोगों ने रिटायर्ड कर्मचारी को यह कहकर डराया कि उनके खाते में मौजूद रकम एक विशेष खाते में भेजी दी जाए। उन रुपयों को ट्रेक कर असली अपराधी को पकड़ा जा सकता है। इसके बाद रिटायर्ड कर्मचारी का नाम मामले से हटा दिया जाएगा। ठगों ने इस पूरे मामले की जानकारी किसी को न देने की हिदायत भी दी।
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रिटायर्ड कर्मचारी से छह लाख की ठगी
ठगों के झांसे में आकर पीड़ित ने 6 नवंबर को आरटीजीएस के माध्यम से उनके बताए एक खाते में छह लाख 30 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। रुपये ट्रांसफर करने के बाद जब पीड़ित ने उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी नंबर बंद मिले। तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी की गई है। पीड़ित की रिपोर्ट पर सकरी पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।