छत्तीसगढ़ में सड़कों पर हो रही गोवंशों की मौत को लेकर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव के हलफनामें पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि गोवशों की सुरक्षा को लेकर अफसरों द्वारा किए गए प्रयास काफी नहीं हैं। साथ ही कोर्ट ने एनएचएआई के प्रयोजना निदेशक से हलफनामा मांगा है।
By Roman Tiwari
Publish Date: Sun, 17 Aug 2025 03:15:27 PM (IST)
Updated Date: Sun, 17 Aug 2025 03:18:15 PM (IST)

HighLights
- राज्य में गोवंशों की मौत को लेकर मुख्य सचिव के हलफनामे पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
- NHAI के परियोजना निदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के दिए निर्देश
- कोर्ट ने जनता को जागरूक करने के लिए सकारात्मक अभियान चलाने के दिए निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा मवेशियों की वजह से बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) द्वारा उठाए गए कदम इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
खंडपीठ मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल ने रतनपुर–केंदा मार्ग (एनएच 45) पर एक अज्ञात वाहन की चपेट में आने से 16 लावारिस मवेशियों की मौत की घटना पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि घटना के बाद संयुक्त निगरानी दल गठित किए गए हैं, 2,000 से अधिक मवेशियों पर रेडियम पट्टी लगाई गई है, नसबंदी और कान टैगिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही आश्रय स्थल की व्यवस्था और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान भी की गई है।
NHAI के निदेशक से मांगा हलफनामा
इसके बावजूद न्यायालय ने माना कि दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे स्पष्ट है कि अब तक किए गए उपाय पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने एनएचएआइ के परियोजना निदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें बेसहारा पशुओं की रोकथाम और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण हो।
साथ ही न्यायालय ने एनएचएआइ को यह भी निर्देश दिए कि वह जनता को जागरूक करने के लिए सकारात्मक अभियान चलाए, ताकि वाहन चालक सतर्क रहें और न तो मानव जीवन और न ही सड़क पर बैठे पशुओं को नुकसान पहुंचे।
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नईदुनिया ने उठाया था मुद्दा
सड़क पर बैठे बेसहारा मवेशियों और वाहन चालकों की लगातार हो रही मौतों को लेकर नईदुनिया ने अभियान चलाया था। इसमें बताया गया था कि नगर निगम के साथ ही स्थानीय निकाय इसे लेकर गंभीर नहीं है। साथ ही मवेशी मालिक भी जमकर लापरवाही बरत रहे हैं। हाई कोर्ट की कड़ाई के बाद कुछ मवेशी मालिकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। हालांकि यह भी अपर्याप्त है। अभी भी मवेशी सड़कों पर विचरण करते देखे जा सकते हैं।