Bilaspur News: पीताम्बरा पीठ मंदिर में आज से महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ प्रारंभ

Author name

July 11, 2025


Bilaspur News: श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में गुरुवार, 11 जुलाई से 9 अगस्त तक महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस एक माह तक चलने वाले विशेष अनुष्ठान में प्रतिदिन पारदेश्वर महादेव का नमक-चमक विधि से रुद्राभिषेक किया जाएगा।

By Akash Pandey

Publish Date: Fri, 11 Jul 2025 05:58:19 PM (IST)

Updated Date: Fri, 11 Jul 2025 05:58:19 PM (IST)

Bilaspur News: पीताम्बरा पीठ मंदिर में आज से महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ प्रारंभ
पीताम्बरा पीठ मंदिर ( फाइल फोटो)

HighLights

  1. आज से आयोजित होगा महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ।
  2. प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जाएगा भोलेनाथ का अभिषेक।
  3. श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होने के लिए अपील।

नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर: श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में गुरुवार, 11 जुलाई से 9 अगस्त तक महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस एक माह तक चलने वाले विशेष अनुष्ठान में प्रतिदिन पारदेश्वर महादेव का नमक-चमक विधि से रुद्राभिषेक किया जाएगा। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जाएगा, जिसके बाद महाआरती संपन्न होगी।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि रुद्राभिषेक से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का जागरण होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, रुद्र का अर्थ है भूतभावन शिव, और शिव तथा रुद्र एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। रुद्राभिषेक से न केवल शिव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि यह सभी देवताओं की पूजा के समान फलदायी होता है।

उन्होंने बताया कि रुद्राभिषेक विभिन्न मनोरथों की पूर्ति के लिए किया जाता है, जिसके लिए अलग-अलग द्रव्यों का उपयोग होता है। जैसे—

  • जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है।
  • कुशोदक से असाध्य रोगों की शांति होती है।
  • दही से भवन-वाहन की प्राप्ति होती है।
  • गन्ने के रस से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • शहद और घी से धनवृद्धि होती है।
  • तीर्थजल से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इत्र मिले जल से बीमारियां दूर होती हैं।
  • दुग्ध या गोदुग्ध से पुत्र प्राप्ति होती है।
  • शीतल जल और गंगाजल से ज्वर शांत होता है।
  • घृतधारा और सहस्रनाम मंत्र से वंश विस्तार होता है।
  • सरसों के तेल से शत्रु पराजित होता है।
  • शहद से यक्ष्मा (टीबी) दूर होती है।

मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पुण्य अवसर का लाभ उठाने की अपील है।



Source link