Bilaspur Train Accident: CSR के प्राथमिक रिपोर्ट में बड़े खुलासे, रेलवे प्रशासन की बड़ी चूक से रेस्क्यू में देरी

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December 13, 2025


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बिलासपुर पैसेंजर ट्रेन हादसा मामले में सीआरएस ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। पूरी जांच और सभी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस फाइनल रिपोर्ट के आने में अभी कुछ समय लग सकता है, जिससे हादसे के पूर्ण कारणों का विस्तृत खुलासा होगा।

सीआरएस की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, गतौरा- बिलासपुर के बीच हुए रेल हादसे में कंट्रोलर को घटना की सूचना देर से दी गई। इसके हुटर बजने में विलंब हुआ और इसी वजह से राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुए।

रेल प्रशासन के नियमों के अनुसार, किसी भी रेल हादसे के एक मिनट के भीतर कंट्रोलर को सूचना देना अनिवार्य है। इसके बाद कंट्रोलर सभी संबंधित अधिकारियों और स्टॉफ को हुटर के माध्यम से तुरंत सूचित करता है, जिससे रिलीफ ट्रेन और अन्य विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर सके। मुख्य सुरक्षा आयुक्त की जांच के दौरान इस घटना में सात मिनट बाद कंट्रोलर को सूचना देने की बात सामने आई है।

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चार नवंबर को लगभग शाम चार बजे गेवरारोड-बिलासपुर मेमू अप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। टक्कर के बाद कंट्रोलर को सूचना देने में सात मिनट की देरी हुई। इसके कारण स्टेशन में हुटर भी समय पर नहीं बजा। जिस वजह से जोन और मंडल के अधिकारी समेत अन्य अमले को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हुई। इस वजह से दुर्घटना में घायल यात्रियों की मदद और बचाव कार्य में देरी हुई है।

सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी

रेल प्रशासुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सन की इस चूक ने सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी को उजागर किया है। मुख्य संरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट में इस चूक का उल्लेख है। इसके साथ ही टिप्पणी भी की है कि समय पर सूचना और तत्काल राहत कार्य यात्रियों की जान बचाने के लिए निर्णायक होते।

इस घटना में चालक विद्यासागर समेत 13 यात्रियों की मौत हुई और 20 यात्री घायल हुए। मृतक व घायलों की संख्या दर्शाता है कि नियमों का पालन न होने पर परिणाम कितना गंभीर हो सकता है। रिपोर्ट में सीआरएस ने स्पष्ट लिखा है कि रेलवे प्रशासन को अब अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूती देने की सख्त आवश्यकता है।

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फाइनल रिपोर्ट के बाद नपेंगे कई अधिकारी व कर्मचारी

यह सीआरएस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। जिस पर रेल प्रशासन अपना पक्ष रखेगा। पूरी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड जाएगी। रेलवे बोर्ड अपनी रिपोर्ट देगा। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बादसीआरएस फाइनल रिपोर्ट देंगे।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में रेल प्रशासन की जिस तरह लापरवाही उजागर हुई है, उससे माना जा रहा है कि फाइनल रिपोर्ट आने के बाद संरक्षा व रेलवे विद्युत विभाग के कई अधिकारी व कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

हालांकि कुछ कार्रवाई स्थानीय स्तर पर घटना के बाद हो चुकी है। जिसमें सीनियर डीईई व सीनियर सीएसओ को हटा दिया गया है। वहीं असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज को निलंबित भी कर दिया गया है।



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