Bharatmala Project: भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा वितरण को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार की आशंका के बाद EOW ने जांच शुरू कर दी है। बिलासपुर से पथरापाली खंड म …और पढ़ें

HighLights
- हेक्टेयर की जगह वर्गफीट दर से मुआवजे का आरोप
- राजस्व रिकॉर्ड और हितग्राही सूची की होगी तुलना
- NHAI ने पहले भी लागत बढ़ने पर उठाए थे सवाल
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: माल परिवहन को सुगम बनाने और यातायात के दबाव को कम करने के उद्देश्य से शुरू किए गए भारतमाला प्रोजेक्ट (CG Bharatmala Project) में मुआवजा वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है। इस संबंध में प्राप्त शिकायत के बाद अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की ओर से जांच की जाएगी। EOW ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की है।
इन खंडों पर विशेष फोकस
जांच के दौरान विशेष रूप से बिलासपुर से उरगा के बीच 70 किलोमीटर और उरगा से पथरापाली के बीच 105 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए हुए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की बारीकी से जांच की जाएगी। वर्तमान में इन क्षेत्रों में भारतमाला प्रोजेक्ट का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है।
हेक्टेयर से वर्गफीट में बदली दरें?
आरोप है कि छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि में भारी भ्रष्टाचार किया गया। नियमानुसार मुआवजा हेक्टेयर के आधार पर दिया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने कथित तौर पर भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत कर हेक्टेयर की जगह वर्गफीट के आधार पर मुआवजा तय किया। इससे मुआवजा राशि कई गुना बढ़ गई और करोड़ों रुपये की बंदरबांट होने की आशंका जताई जा रही है।
राजस्व रिकॉर्ड की होगी जांच
EOW की टीम अब इस “वर्गफीट के खेल” की सच्चाई सामने लाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड की जांच करेगी। भूमि अधिग्रहण के समय किए गए सर्वे, तय की गई दरें और मुआवजा प्राप्त करने वाले हितग्राहियों की सूची का मिलान किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में मुआवजे की दरों में बदलाव किया गया।
पूरे प्रदेश से मांगे गए दस्तावेज
EOW ने केवल बिलासपुर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन सभी जिलों के कलेक्टरों से भी दस्तावेज मांगे हैं, जहां से भारतमाला प्रोजेक्ट गुजर रहा है। जांच शुरू होते ही राजस्व विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, जो इस प्रक्रिया में शामिल थे।
बिलासपुर-उरगा खंड में पहले भी उठे थे सवाल
बिलासपुर से उरगा के बीच 70 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2017 से 2019 के बीच जमीन अधिग्रहण किया गया था। उस समय बिलासपुर के ढेका क्षेत्र में एसडीएम देवेंद्र पटेल और कीर्तिमान राठौर के कार्यकाल में मुआवजे की फाइलें तैयार की गई थीं। जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया एसडीएम की अनुमति से ही होती है।
NHAI ने जताया था संदेह
अधिग्रहण के दौरान जब प्रोजेक्ट की लागत अचानक दोगुनी हो गई, तो एनएचएआइ ने इस पर संदेह जताते हुए कमिश्नर कोर्ट में याचिका दायर की थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मुआवजा पुनः हेक्टेयर के आधार पर निर्धारित किया गया। अब ईओडब्ल्यू इन्हीं पुराने दस्तावेजों, शिकायतों और अदालती प्रक्रियाओं को आधार बनाकर कथित भ्रष्टाचार की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।