CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अविवाहित बेटी को भी मिलेगा भरण-पोषण और विवाह खर्च… पिता की अनिवार्य जिम्मेदारी

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November 25, 2025


CG High Court News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भरण-पोषण और विवाह खर्च को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने अपने फैसले में कहा कि अविवाहित बेटी का भरण-पोषण और विवाह खर्च उठाना पिता की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, चाहे बेटी बालिग ही क्यों न हो।

By Anil Kurre

Publish Date: Tue, 25 Nov 2025 08:57:55 PM (IST)

Updated Date: Tue, 25 Nov 2025 08:57:55 PM (IST)

CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अविवाहित बेटी को भी मिलेगा भरण-पोषण और विवाह खर्च... पिता की अनिवार्य जिम्मेदारी
CG हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, पिता की याचिका खारिज। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अविवाहित बेटी को विवाह खर्च मिलने का अधिकार।
  2. पिता की आय का उल्लेख कर कोर्ट ने निर्णय दिया।
  3. फैमिली कोर्ट का आदेश पूरी तरह बरकरार।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने भरण-पोषण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि बेटी के भरण-पोषण के साथ ही विवाह का खर्च उठाना पिता की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनती है। पिता अपनी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इस टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने पिता की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है।

अविवाहित बेटी की कानूनी जिम्मेदारी पिता की

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में साफ कहा है कि अविवाहित बेटी के भरण-पोषण और वैवाहिक खर्च उठाने की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी पिता की है। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि यह नैतिक रूप से बाध्यकारी है कि पिता अपनी बेटी का वैवाहिक खर्च का वहन करे। भले ही बेटी बालिक क्यों न हो। 25 वर्षीय अविवाहित बेटी ने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 20 और 3(बी) के तहत परिवार न्यायालय में आवेदन पेश भरण-पोषण और विवाह का खर्च उठाने पिता को निर्देशित करने की मांग की थी।

बेटी ने बताया कि उसके पिता शासकीय शिक्षक है और 44,642 रूपये मासिक वेतन पाते हैं। बेटी ने मासिक भरण-पोषण और 15 लाख विवाह खर्च की मांग की। मामले की सुनवाई करते हुए सूरजपुर परिवार न्यायालय ने पिता को 2,500 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने और विवाह खर्च के लिए पांच लाख रुपये देने के निर्देश दिए थे। परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का किया उल्लेख

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि अविवाहित, असहाय बेटी को पिता से भरण-पोषण पाने का अधिकार पूर्ण और लागू करने योग्य है, चाहे वह बालिग ही क्यों न हो। कोर्ट ने कहा, बेटी भले ही 25 वर्ष की है, लेकिन वह अपने पिता से विवाह खर्च और भरण-पोषण पाने की हकदार है।



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