नाबालिग साबित हुआ 24 साल पुराने दुष्कर्म मामले का आरोपी, Chhattisgarh HC ने सजा रद्द करते हुए सुनाया यह फैसला

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September 17, 2025


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 24 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में आरोपी की 7 साल कारावास की सजा माफ कर दी है। मामले की सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि वारदात के समय आरोपी नाबालिग था, ऐसे में उसे सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने मामले को किशोर न्याय बोर्ड को भेजा है।

Publish Date: Wed, 17 Sep 2025 10:36:50 AM (IST)

Updated Date: Wed, 17 Sep 2025 10:42:55 AM (IST)

नाबालिग साबित हुआ 24 साल पुराने दुष्कर्म मामले का आरोपी, Chhattisgarh HC ने सजा रद्द करते हुए सुनाया यह फैसला
24 साल पुराने दुष्कर्म के मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा माफ की

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सजा रद कर केस किशोर न्याय बोर्ड को भेजा
  2. 3-4 जुलाई 2001 को रतनपुर क्षेत्र के गांव में हुई थी घटना
  3. हाई कोर्ट ने कहा अपराध की तारीख पर उम्र देखी जाती है

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 24 साल पुराने दुष्कर्म केस में आरोपी की 7 साल की सजा रद्द कर दी है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने कहा कि घटना के समय आरोपी 16 साल 8 माह का नाबालिग था, इसलिए केस किशोर न्याय बोर्ड को भेजा जाता है। बोर्ड को छह माह में निर्णय देने के निर्देश दिए गए हैं।

हाई कोर्ट में की अपील

सजा के खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान उसने दावा किया कि घटना के समय वह नाबालिग था। बचाव पक्ष ने स्कूल रिकॉर्ड भी पेश किया, जिसके अनुसार उसकी जन्मतिथि 15 अक्टूबर 1984 है। इस हिसाब से घटना के दिन उसकी उम्र 16 साल 8 महीने 19 दिन थी।

घटना 3-4 जुलाई 2001 की रात रतनपुर क्षेत्र के एक गांव की है। पीड़िता 15 वर्ष की किशोरी थी। आरोपी उसका रिश्ते में मौसेरा भाई है। घटना की रात वह पीड़िता के घर में रुका था। देर रात उसने जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन पीड़िता ने स्वजन को पूरी बात बताई। फिर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। अपराध सिद्धि पर सेशन कोर्ट ने 29 अप्रैल 2002 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत 7 साल सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला

जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के हरीराम बनाम राजस्थान राज्य और भारत भूषण बनाम दिल्ली सरकार व अन्य मामलों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की तारीख पर उम्र देखी जाती है, न कि सजा सुनाए जाने की तारीख पर। अदालत ने माना कि आरोपी नाबालिग था और उसे किशोर न्याय अधिनियम, 2000 का लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद करते हुए केस को किशोर न्याय बोर्ड बिलासपुर को भेजने का निर्देश दिया।

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बोर्ड को आदेश दिया गया कि वह आरोपी की उम्र, अब तक बिताई गई जेल अवधि (करीब डेढ़ साल) और वर्तमान परिस्थितियों, जिनमें यह तथ्य भी शामिल है कि आरोपी और पीड़िता अब अलग-अलग परिवारों में शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं, उनको देखते हुए छह महीने में अंतिम निर्णय दे। हाई कोर्ट ने आरोपी की जमानत बरकरार रखी है। उसे 8 अक्टूबर 2025 को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश होना होगा।



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