बिना वजह पति से अलग रह रही पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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February 6, 2026


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रह रही है …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 06 Feb 2026 03:06:21 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Feb 2026 03:06:21 PM (IST)

बिना वजह पति से अलग रह रही पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
  2. बिना ठोस कारण के गुजारा भत्ता होगा खारिज।
  3. अलग रह रही पत्नी को बताना होगा ठोस कारण।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रह रही है, तो वह मासिक भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी।

यह फैसला 27 जनवरी को बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला की पत्नी भानू अलिगी द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया। पत्नी ने परिवार न्यायालय द्वारा भरण-पोषण से इंकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने की।

कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय के आदेश में कोई ऐसी अवैधता या त्रुटि नहीं है, जिसके चलते हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़े। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों में केवल संबंध ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का आचरण भी न्याय का आधार होता है।

दहेज प्रताड़ना का आरोप, लेकिन सबूत नहीं

प्रवीण कुमार और भानू अलिगी का विवाह 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर में हुआ था। विवाह के कुछ दिनों बाद पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए। 19 अक्टूबर 2020 को महिला थाना, बिलासपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें कार और 10 लाख रुपये की मांग तथा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया।

हालांकि, पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर मामला न्यायालय पहुंचा, जहां 19 मार्च 2021 को याचिका खारिज कर दी गई। बाद में पुनरीक्षण याचिका भी सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि जब पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की थी, तब पत्नी के पास वैवाहिक जीवन पुनः शुरू करने का अवसर था। ऐसी स्थिति में भरण-पोषण का दावा स्वीकार्य नहीं है।



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