बिलासपुर में मिसल रिकॉर्ड में हेराफेरी कर वारिसों ने किया करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल

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February 2, 2026


Bilaspur News: लिंगियाडीह क्षेत्र में पूर्वजों की 1.80 एकड़ बेशकीमती भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने के लिए पिता-पुत्रों ने साजिश रची और एक ह …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 02 Feb 2026 02:03:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Feb 2026 02:03:05 PM (IST)

बिलासपुर में मिसल रिकॉर्ड में हेराफेरी कर वारिसों ने किया करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल
बिलासपुर में मिसल रिकॉर्ड में हेराफेरी कर वारिसों ने किया करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल

HighLights

  1. 1974 और फिर 2000 में नामांतरण अपने नाम करा लिया
  2. चार बार में कुल 0.22 एकड़ का हुआ नामांतरण
  3. रिपोर्ट में विक्रेताओं के नाम और पूरी प्रक्रिया संदेहास्पद

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। लिंगियाडीह क्षेत्र में पूर्वजों की 1.80 एकड़ बेशकीमती भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने के लिए पिता-पुत्रों ने साजिश रची और एक ही जमीन का चार बार नामांतरण करवा लिया।

आवेदक शिवराज सिंह की शिकायत पर हुई एसडीएम जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भू-माफिया ने 1929 के मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करोड़ों की जमीन अपने नाम करवा लिया।

एसडीएम बिलासपुर ने अपने जांच प्रतिवेदन में बताया कि खसरा नंबर 103/1 की भूमि को हड़पने के लिए कूटरचित तरीके से फर्जी विक्रय पत्र तैयार किए गए थे। जांच में पाया गया कि दोषी विजय सिंह और बृजभान सिंह, दोनों के पिता भुनेश्वर सिंह व उनके वारिसों ने मिलकर जालसाजी को अंजाम दिया।

1974 और फिर 2000 में नामांतरण अपने नाम करा लिया

इन लोगों ने वर्ष 1969 से 1973 के बीच मनराखन, नारायण ढीमर व एक अन्य व्यक्तियों के नाम से फर्जी रजिस्ट्री कराई, जिनका सरकारी रिकॉर्ड में उस समय कोई अस्तित्व ही नहीं था। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आरोपितों ने छलपूर्वक 1974 और फिर 2000 में नामांतरण अपने नाम करा लिया।

रिपोर्ट में विक्रेताओं के नाम और पूरी प्रक्रिया को संदेहास्पद करार दिया गया है। आवेदक ने अब कलेक्टर से इन दोषियों के विरुद्ध तत्काल एफआइआर दर्ज करने की गुहार लगाई है।

चार बार में कुल 0.22 एकड़ का हुआ नामांतरण

प्रथम बार 31/07/1969 को 0.02 एकड़ भूमि का फर्जीवाड़ा। द्वितीय बार 01/11/1969 को पुनः 0.02 एकड़ भूमि हड़पी गई। तृतीय बार 26/12/1973 को 0.09 एकड़ का फर्जी विक्रय पत्र। चौथी बार कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर 0.11 एकड़ भूमि वर्ष 2000 में अपने नाम दर्ज करा ली।

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1929 के मिसल रिकॉर्ड से छेड़छाड़

आवेदक की शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि आवेदक शिवराज सिंह के पूर्वज स्व. नारायण सिंह के नाम पर वर्ष 1929 के मिसल बंदोबस्त में 1.80 एकड़ भूमि दर्ज थी। आरोपितों ने इसी खसरा नंबर में फर्जी गवाहों और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए छेड़छाड़ की। एसडीएम रिपोर्ट में साबित हो रहा है कि आरोपितों ने सरकारी तंत्र को गुमराह कर यह बड़ा भूमि घोटाला किया है।

जांच प्रतिवेदन में पता चला कि पिता-पुत्र व उनके रिश्तेदारों ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेज के आधार पर ऐसे व्यक्तियों के नाम से जमीन का नामांतरण कराया है जिनका दस्तावेज में कोई रिकॉर्ड नहीं है। जांच में दोषी पाए जाने पर दस्वावेज कलेक्टर कार्यालय प्रेषित किया गया है।

-मनीष साहू एसडीएम बिलासपुर



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