बिलासपुर में रावण दहन के साथ निकलेगी भगवान श्रीराम की शोभायात्रा, जीवंत झांकियां भी शामिल

Author name

October 1, 2025


101 फीट तक के रावण के पुतलों का दहन

विजयादशमी की तैयारियां विभिन्न समितियों की ओर से जोर-शोर से की गई हैं। इस बार रावण दहन कार्यक्रम विभिन्न समितियों द्वारा भव्य रूप में मनाया जाएगा। रावण दहन के साथ ही जय श्रीराम के जयघोष के साथ भक्तिमय माहौल रहेगा। शहर के पुलिस मैदान, नूतन चौक सरकंडा, पुराना बस स्टैंड, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान, कारगिल चौक, ग्रीन पार्क मुंगेली नाका, रेलवे परिक्षेत्र, मिनोचा कॉलोनी, नूतन चौक सरकंडा समेत शहर के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर रावण दहन का कार्यक्रम होगा। वहां 40 से लेकर 101 फीट तक के रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। यह रावण दहन कार्यक्रम शाम छह बजे से रात नौ बजे तक संपन्न होगा। शहर की सभी प्रमुख रावण दहन समितियों की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में रावण दहन स्थल में शाम पांच बजे से भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी।

बेटों का होगा पूजन

घरों में बेटों का पूजन किया जाएगा। मान्यता है कि बेटे भगवान श्रीराम के लंका विजय में सहयोग कर लौटे हैं। इस वजह से घर-घर बेटों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाएगा और आरती कर पूजन होगा। इसके साथ ही वाहनों का भी पूजन किया जाएगा। साथ ही घरो-घर में विशेष पकवान बनाए जाएंगे।

इन प्रमुख स्थानों में होगा रावण दहन

– एनईआइ ग्राउंड रेलवे परिक्षेत्र: शाम छह बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– पुलिस मैदान: शाम साढ़े छह बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– संघ कार्यालय: शाम सात बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– लाल बहादुर शास्त्री मैदान: शाम साढ़े सात बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– साइंस कालेज मैदान: शाम साढ़े सात बजे, मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री तोखन साहू

– ग्रीन गार्डन मुंगेली नाका रोड: रात आठ बजे, मुख्य अतिथि कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव

– पुराना बस स्टैंड चौक: रात आठ बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– नूतन चौक सरकंडा: रात साढ़े आठ बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

– चांटीडीह मेलापारा: रात नौ बजे, मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल

शहर में छोटे-बड़े दो हजार से ज्यादा जलेंगे रावण के पुतले

इस साल विजयदशमी पर्व बड़े ही धूमधाम से से मनाया जा रहा है। ऐसे में विजयादशमी पर्व के लिए भी लोगों में उमंग नजर आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक शहर के मोहल्ले, कालोनियों, बस्तियां आदि मिलाकर दो हजार से ज्यादा छोटे-बड़े रावण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाएगा।

इन स्थानों में इतने फीट का रहेगा रावण

पुलिस मैदान – 70 फीट

लाल बहादुर शास्त्री मैदान – 70 फीट

एनईआइ स्टेडियम – 65 फीट

मिनोचा कालोनी – 60 फीट

पुराना बस स्टैंड चौक – 60 फीट

साइंस कालेज मैदान – 101 फीट

जगह-जगह निकाली जाएगी शोभायात्रा

कार्यक्रम के साथ ही जगह-जगह भगवान श्रीराम की शोभायात्रा निकलेगी। इसमें राम-सीता व लक्ष्मण और बजरंग बली की जीवंत झांकी भी निकाली जाएगी। यह भी रावण दहन कार्यक्रम में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। वहीं शहर के मुख्य रावण दहन कार्यक्रम नगर निगम का रहता है, जिसमें पुलिस मैदान में रावण का वध किया जाता है। इसके पूर्व तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर से भगवान श्री राम की झांकी निकाली जाएगी, जो शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए पुलिस मैदान में पहुंचेगी।

100 रुपये से पांच हजार तक के रावण के पुतले बाजार में

रावण दहन की प्रथा बढ़ती ही जा रही है। छोटे-छोटे मोहल्ले में भी रावण दहन कार्यक्रम होता है। साथ ही बच्चे भी बुराई रूपी रावण का वध भगवान राम बनकर करते हैं। ऐसे में बाजार में छोटे से लेकर बड़े रेडीमेड रावण के पुतले भी बिकने को आते हैं। बाजार में 100 रुपये से पांच हजार तक के पुतले उपलब्ध हैं। ये दो फिट से 30 फीट तक के हैं। शहर अंतर्गत पुराना बस स्टैंड चौक, राजीव गांधी चौक, शनिचरी बाजार, गांधी चौक के सात कुछ अन्य स्थानों में रेडीमेड पुतले बाजार में सज चुके हैं, जिनकी जमकर बिक्री हो रही है।

नीलकंठ के दर्शन की आस में निकलेंगे आस्थावान

दशहरा के दिन को लेकर मान्यता है कि नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। ऐसे में दशहरे के दिन सुबह कई श्रद्धालु नीलकंठ देखने के तमाम प्रयास करेंगे। जिन्हें यह पक्षी दिखेगा, वे स्वयं को भाग्यशाली मानेंगे। ऐसे में सुबह इसी आस में कई लोग विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे, विशेषकर रेलवे परिक्षेत्र व स्मृतिवन राजकिशोर नगर में जाएंगे।

सोन पत्ती बांटकर साझा करेंगे खुशी

विजयादशमी पर परंपरा के अनुसार सोनपत्ती दोस्तों, स्वजन, रिश्तेदारों को बांट कर दशहरे की शुभकामनाएं दी जाती हैं और बुजुर्गों से आर्शीवाद लिया जाता है। दशहरे पर जिस सोन पत्तियों को बांटा जाता है, इसे पौराणिक ग्रंथों में ‘शमी के पेड़ की पत्ती’ बताया गया है। रामायण में जिक्र है कि भगवान राम ने लंका विजय से पहले शमी के पेड़ की पूजा की थी। ऐसा माना जाता है कि शमी के पेड़ में भगवान कुबेर का भी वास होता है। इस बार भी यह परंपरा निभाई जाएगी।



Source link