शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहीं सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस अरविंद वर्मा …और पढ़ें

HighLights
- रायपुर हाई कोर्ट से सौम्या चौरसिया को मिली बेल
- 3200 करोड़ के घोटाले में थीं आरोपी
- कोर्ट ने इस दौरान ईडी की मांग खारिज की
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहीं सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तय समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं, इसलिए अतिरिक्त समय देना संभव नहीं है। हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों को 20 फरवरी से पहले शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
सौम्या चौरसिया, जो छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रह चुकी हैं, पहले कोयला घोटाले में गिरफ्तार हुई थीं और लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद उन्हें आबकारी घोटाले में फिर गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद चौरसिया ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे पहले खारिज कर दिया गया था।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने नौ फरवरी को उन्हें पुनः हाई कोर्ट जाने और वहां प्राथमिकता से सुनवाई कराने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां बार-बार नई एफआईआर दर्ज कर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत गिरफ्तारी कर रही हैं और अब तक उन्हें छह बार हिरासत में लिया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हाई कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए अंततः उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी।
ये है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी जांच कर रही है। शराब घोटाला मामले में ईडी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है। जिसमें 3200 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआइआर दर्ज है।
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ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आइएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के प्रमुख थे और करीब 1000 करोड़ रुपये उन्हें मिले हैं।