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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद सोमवार को छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राज्य में दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं देने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम शिशुओं को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के लिए उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सिविल सर्जनों को पत्र भेजकर इस नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा है। स्वास्थ्य सेवाएं आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि बच्चों को दवा केवल डॉक्टर की सलाह से ही दी जाए। डॉक्टरों बोले- बच्चों में खांसी-जुकाम अपने आप ठीक हो जाता है डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों को जब खांसी या जुकाम होता है, तो वह ज़्यादातर मामलों में अपने आप ठीक हो जाता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं देनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि माता-पिता और अभिभावकों को इस बारे में सही जानकारी दी जा सके। राज्य में दवाओं की सप्लाई पर कड़ी निगरानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) ने बताया है कि जिन दवा कंपनियों के खिलाफ दूसरे राज्यों में कार्रवाई हुई है, उनकी दवाएं छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं भेजी गई है, और वे CGMSC के रिकॉर्ड में भी दर्ज नहीं है। यह दिखाता है कि राज्य में दवाओं की सप्लाई को लेकर पूरी पारदर्शिता और सतर्कता बरती जा रही है, ताकि लोगों को सुरक्षित दवाएं मिल सकें। छत्तीसगढ़ में दवा दुकानों की जांच तेज खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग ने 5 अक्टूबर को स्वास्थ्य सचिव की बैठक के बाद पूरे राज्य में जोखिम के आधार पर दवा विक्रय स्थानों का निरीक्षण शुरू किया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मेडिकल स्टोर की जांच करें, नियमों का उल्लंघन न हो और आवश्यक जांच करें। स्वास्थ्य विभाग की अभिभावकों से अपील स्वास्थ्य विभाग ने सभी माता-पिता से अपील की है कि बिना डॉक्टर की सलाह बच्चों को कोई खांसी या सर्दी की दवा न दें और अगर बच्चे की तबीयत खराब हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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