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सौम्या तिवारी का शिक्षा से जुड़ाव बचपन से रहा है। उनके पिता डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर रहे और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी हुए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में की, लेकिन बाद में शिक्षा के क्षेत्र को चुना। उनका मानना है कि बच्चों को सही दिशा और मूल्य देकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सनकैचर्स प्रीस्कूल में वे प्रकृति आधारित शिक्षा पर जोर देती हैं। स्कूल परिसर में हरियाली, पौधे और प्राकृतिक वातावरण को प्राथमिकता दी जाती है ताकि बच्चे प्रकृति से जुड़ना सीखें। बच्चों को जानवरों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए फार्म और गौशाला जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। वे मानती हैं कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित होना चाहिए। इंडिया प्राइड अवार्ड को वे समाज के प्रति अपने प्रयासों की पहचान और आगे बढ़ने की प्रेरणा मानती हैं।
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